लाइव/ग्राउंड रिपोर्ट
बारिश के सीजन में यूरिया की किल्लत से किसान-बागवान चल रहे परेशान
शनिवार को हिमफैड गोदाम पहुंची 350 बोरियां, दोपहर बाद हुआ वितरण
सुबह 10:00 बजे गोदाम पहुंचा ट्रक, जिसके बाद लगी किसानों की कतार
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। हिमफैड गोदाम में आखिरकार तीन महीने के लंबे इंतजार के बाद यूरिया खाद की गाड़ी पहुंच गई है। जैसे ही सुबह 10:00 बजे खाद से भरा ट्रक गोदाम पहुंचा, इसकी सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में किसान और बागवान डिपो पर जुटना शुरू हो गए। ट्रक में यूरिया की कुल 350 बोरियां पहुंची थीं, जिन्हें मजदूरों ने उतारना शुरू किया।
दोपहर 12:20 बजे तक गाड़ी पूरी तरह खाली होने के बाद, 12:25 से किसानों का पंजीकरण और आधार कार्ड के जरिये ऑनलाइन अंगूठा लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। किसानों को उनकी बारी के हिसाब से टोकन बांटे जा रहे हैं। हालांकि, बारिश के इस सीजन में खाद की भारी मांग को देखते हुए हिमफैड प्रबंधन ने स्टॉक की कमी के कारण एक सख्त नियम लागू किया है एक आधार कार्ड पर सिर्फ एक बोरी खाद दी जा रही है। अपनी जरूरत से बहुत कम खाद मिलने के कारण कई किसान नाराज और मायूस नजर आए लेकिन मजबूरी में उन्हें एक ही बोरी से संतोष करना पड़ रहा है। खाद न मिलने से किसान-बागवान परेशान इस समस्या को अमर उजाला ने कई बार प्रकाशित किया है। जिसके बाद अब आपूर्ति आना शुरू हो गई है।
ग्राउंड रिपोर्ट
क्या कहते हैं किसान
काफी समय से खाद ही नहीं मिल रही थी। लंबी लाइन के बाद सिर्फ एक ही बोरी मिली है। मांग के हिसाब से यह बहुत कम है, पर न मिलने से तो अच्छा है कि कुछ तो हाथ लगा।
नरबीर सिंह, गांव कठार किसान
इनसेट
खाद के लिए पहले भी कई बार डिपो के चक्कर काट चुके थे लेकिन हर बार स्टॉक न होने से खाली हाथ लौटना पड़ता था। आज खाद आई है, इसके लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ा लेकिन राहत है कि खाली हाथ नहीं जाना पड़ रहा।
किरण कुमार, गांव गरा, धरोट पंचायत
इनसेट
इस समय बारिश का मौसम चल रहा है और फसलों के लिए यूरिया खाद बेहद जरूरी है। तीन महीने बाद आपूर्ति आई है, ऐसे में प्रशासन को किसानों की मांग के अनुसार खाद देनी चाहिए थी। हालांकि, अभी तुरंत गुजारा करने के लिए एक बोरी भी काफी है।
गौरव, सलोगड़ा पंचायत, किसान
इनसेट
खाद आने की खबर मिलते ही मैं डिपो पहुंच गई थी। गाड़ी उतरने और प्रक्रिया पूरी होने तक काफी इंतजार करना पड़ा लेकिन आखिरकार खाद मिल गई। हमें अभी और खाद की जरूरत है, संबंधित प्रबंधन को तुरंत और आपूर्ति के लिए मांग भेजनी चाहिए।
रचना देवी, देवली की सैर, किसान
इनसेट
सिर्फ एक बोरी खाद दी जा रही है जो हमारी खेती की जरूरत के हिसाब से बहुत कम है। हालांकि, हिमफैड प्रबंधक का कहना है कि अगले दो-चार दिनों में एक और गाड़ी आने वाली है, जिसके बाद दोबारा खाद मिलेगी। इसी आश्वासन के भरोसे आज एक ही बोरी लेकर घर लौट रहे हैं।
गणेश दत्त शर्मा, गांव मोली, पंचायत बसाल
इनसेट
तीन माह के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार खाद पहुंच गई है। हालांकि, किसानों की मांग के अनुसार यह आपूर्ति बहुत कम है और अभी सिर्फ 350 बोरी ही पहुंची है। जैसे ही खाद गोदाम में आई, हमने तुरंत इसका वितरण शुरू कर दिया है। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अभी और आपूर्ति आनी बाकी है, जिसके बाद उन्हें दोबारा से खाद प्रदान की जाएगी। फिलहाल स्टॉक सीमित होने के कारण व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक आधार कार्ड पर केवल एक ही बोरी खाद दी जा रही है और इसका ऑनलाइन पंजीकरण भी किया जा रहा है। -अर्पणा, क्षेत्रीय प्रबंधक, हिमफैड (जिला सोलन)
ट्रकों से खाद उतरते हुए। संवाद
ट्रकों से खाद उतरते हुए। संवाद