सोलन-परवाणू हाईवे पर पहाड़ से मिट्टी-पत्थर निकालते एसआरएम कंपनी के कर्मचारी। संवाद
परवाणू-शिमला हाईवे पर एसआरएम कंपनी और एनएचएआई ने मिलकर शुरू किया काम
सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे पर वन-वे किया ट्रैफिक
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर(सोलन)। परवाणू-शिमला नेशनल हाईवे-पांच पर चक्कीमोड़ के बाद अब अन्य खतरनाक होती पहाड़ियों को दरकने से बचाने के लिए एनएचएआई और एसआरएम कंपनी ने कमर कस ली है। हाईवे पर भूस्खलन के खतरे को देखते हुए खतरनाक पहाड़ियों को सुरक्षित करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। इस बार कंपनी पुरानी नाकाम तकनीकों के बजाय नई रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। हाईवे पर सुरक्षा को देखते हुए उन पहाड़ियों से कच्चा मलबा और फंसे हुए पत्थरों को हटाया जा रहा है, जो बरसात में ढह सकते हैं। काम के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे पर फिलहाल वन-वे ट्रैफिक किया गया है। मशीनों के जरिए ढलान से मिट्टी हटाई जा रही है, ताकि भारी बारिश में भूस्खलन की स्थिति पैदा न हो।
पिछली बार फेल हुई थी मैक मैश तकनीक
गौरतलब है कि पिछली बरसात में चक्कीमोड़ के पास लगाई गई मैक मैश हाइड्रोजन ग्रीन शीट तकनीक कुदरत के कहर के आगे बौनी साबित हुई थी। पूरी पहाड़ी दरकने से हफ्तों तक यातायात ठप रहा था और करोड़ों का नुकसान हुआ था। उस नाकामी से सीख लेते हुए अब मिट्टी हटाने के बाद वहां कंक्रीट के मजबूत डंगे (रिटेनिंग वॉल) लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
कोट
चक्कीमोड़ की मुख्य पहाड़ी को रोकना एक बड़ी चुनौती है। इस बार सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि नई रणनीति से बरसात में पहाड़ी नहीं दरकेगी और यातायात सुचारू रहेगा।
-मनोज कुमार, अधिकारी, एसआरएम कंपनी