नालागढ़ (सोलन)। परिवहन तकनीकी कर्मचारी संगठन की विशेष बैठक में सरकार की ओर से कुछ कर्मशालाओं को आउटसोर्स पर करने का विरोध किया। बैठक का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष पूर्ण शर्मा और प्रधान खेमचंद ने किया। अध्यक्ष पूर्ण शर्मा ने कहा कि सरकार और निगम प्रबंधन कर्मशालाओं के निजीकरण पर जोर दे रहे हैं, लेकिन इससे कर्मचारियों और आम जनता को कोई फायदा नहीं होगा। संगठन ने प्रबंधन के साथ पत्राचार किया, लेकिन निगम ने न तो स्पष्टीकरण दिया और न ही वार्ता के लिए बुलाया। इसका मतलब है कि प्रबंधन ट्रेड यूनियनों को विश्वास में लेना भी उचित नहीं समझ रहा। संगठन ने यह भी पूछा कि क्या निगम के घाटे का कारण कर्मशालाएं हैं। कर्मशाला कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में दिन-रात मेहनत कर निगम को संभालने में जुटे हुए हैं। संगठन ने बार-बार पत्राचार और बैठक के माध्यम से सुझाव दिया कि कर्मशालाओं का आधुनिकीकरण किया जाए और स्टाफ की भारी कमी को देखते हुए नई भर्ती की जाए। प्रधान खेमचंद ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान और अन्य कठिन परिस्थितियों में कर्मशाला कर्मचारियों ने जो मेहनत की, उसके बावजूद उनकी अनदेखी की जा रही है। 19 दिसंबर को परिवहन निदेशक मंडल की बैठक में पीसमील कर्मचारियों को अनुबंध में लेने का निर्णय लिया गया था, लेकिन फरवरी के अंतिम सप्ताह में भी इसे लागू नहीं किया गया। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते निगम कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान और देय राशि का भुगतान नहीं किया गया तो कर्मशाला कर्मचारी आंदोलन पर उतर सकते हैं। जिम्मेदारी पूरी तरह निगम प्रबंधन की होगी।
नालागढ़ में परिवहन तकनीकी कर्मचारी संगठन की बैठक को संबोधित करते हुए राज्य कार्यकारिणी के पदाधि