फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Solan News: कीवी, जापानी फल समेत इस बार गुठलीदार पौधों की है अधिक मांग

विज्ञापन
विज्ञापन
नौणी विवि में कीवी के पौधे खत्म, गुठलीदार 70 फीसदी तक की खरीद
विज्ञापन

लंबे सूखे के कारण किसान-बागवान नहीं कर रहे थे पौधों की खरीद
अब बारिश और बर्फबारी के बाद पौधों की खरीद में भी आएगी बढ़ोत्तरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन (सोलन)। प्रदेश में लंबे सूखे के कारण किसान-बागवान फलदार पौधों की खरीद भी नहीं कर रहे थे, लेकिन अब बारिश के बाद पौधों की मांग बढ़नी शुरू हो गई है। इसमें कीवी, जापानी समेत गुठलीदार फलों के पौधों की अधिक मांग है। नौणी विवि की बात करें, तो यहां कीवी के पौधे खत्म हो चुके हैं, जबकि गुठलीदार और जापानी फल के 70 फीसदी पौधे बिक चुके हैं। वहीं, सेब के पौधों की मांग इस बार कम हुई है।
जानकारी के अनुसार, नौणी विश्वविद्यालय ने अपनी नर्सरियों में विभिन्न प्रकार के करीब 2 लाख पौधे तैयार कर बिक्री के लिए रखे हैं। इस बार 16 दिसंबर से बिक्री का कार्य शुरू कर दिया था। प्रदेश में बारिश व बर्फबारी न होने से सभी लोग परेशान थे, न तो पर्यटक हिमाचल के रुख कर पा रहे हैं और न ही फसलों के लिए मौसम ठीक हो पा रहा है। बारिश-बर्फबारी न होने से सबसे ज्यादा परेशान किसान-बागवान थे। जिन किसानों ने पौधों की खरीद कर ली थी, वह सूखे के चलते बगीचों में नहीं लगा पा रहे थे। वहीं, कुछ किसान-बागवानों ने तो सूखे के चलते पौधों की खरीद ही नहीं की है। अब बारिश के बाद पौधों की मांग भी बढ़नी शुरू हो गई है। नौणी विवि की बात करें तो यहां पर कीवी के पौधे खत्म हो चुके हैं। जापानी और गुठलीदार फलों की अधिक मांग से अब ये पौधें में थोड़े ही रह हैं। उधर, निदेशक अनुसंधान नौणी विवि डॉ. संजीव चौहान सूखे के चलते स्टोन फ्रूट्स के मुकाबले सेब के पौधों की बिक्री कम हुई है। इस बार अधिक मांग गुठलीदार, जापानी फल और कीवी की रही है। हालांकि, अब बारिश और बर्फबारी हो गई है, जिससे सेब की मांग आनी भी शुरू हो गई है। अगले वर्ष के लिए गुठलीदार फलों को बढ़ाने की भी कोशिश की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक घनमीटर का बनाएं गड्ढा
जड़ों के विकास के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें फैलने के लिए जरूरी स्थान और आहार मिले, इसलिए नियत स्थान पर एक घन मीटर का गड्ढा बनाएं। गड्ढे की मिट्टी को 10-12 दिन तक खुला रहने दें, ताकि धूप लग सके। इससे हानिकारक जीवाणू और कीड़े नष्ट हो जाते हैं। पौधा लगाने से लगभग 15-20 दिन पहले गड्ढा मिट्टी से भरें और 20-30 किलोग्राम गली-सड़ी गोबर की खाद और आधा किलोग्राम सुपर फास्फेट भी डालें। इसके बाद पानी डालें, ताकि मिट्टी ठीक ढंग से बैठ जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें