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महंगे पानी बिल पर अधिकारियों से होगी बैठक : मुकेश

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महापौर ऊषा शर्मा ने उप मुख्यमंत्री से उठाया मामला
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बोलीं, 26 की जगह अब 100 रुपये में मिल रहा 1000 लीटर पानी
जल शक्ति विभाग को ही पानी वितरण का जिम्मा देने का किया आग्रह
उपमुख्यमंत्री ने कहा निगम चुनाव में किए वायदे होंगे पूरे
संवादा न्यूज एजेंसी
सोलन। जल शक्ति विभाग से नगर निगम को 100 रुपये में 1000 लीटर पानी मिलने का मामला फिर उप मुख्यमंत्री से उठाया गया। इसको लेकर निगम महापौर ऊषा शर्मा ने उप मुख्यमंत्री और जल शक्ति विभाग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि जल्द 100 रुपये में 1000 लीटर पानी बिल पर अधिकारियों से बैठक की जाएगी। इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव के समय में किए वादे भी पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने शिमला में पानी के वादे को लेकर बात की है। इसके साथ महापौर ने भी ज्ञापन दिया है। इस दौरान महापौर ने पानी वितरण को जल शक्ति विभाग को देने का आग्रह भी किया।
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महापौर ने उपमुख्यमंत्री से कहा कि नगर निगम अभी तक पानी की सप्लाई शहर में करता आया है। निगम को 27 रुपये प्रति 1000 लीटर की दर से पानी की आपूर्ति की जा रही थी। इस दर को बढ़ाकर 100 रुपये प्रति 1000 लीटर कर दिया। इससे निगम पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि निगम की ओर से शहरवासियों को पुरानी दरों पर पानी की आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में जल शक्ति विभाग को ही पानी की आपूर्ति का जिम्मा दे दिया जाए ताकि पानी बिल का बोझ निगम पर न पड़े।
गौर रहे कि इससे पहले मुख्यमंत्री से भी निगम महापौर और पार्षद मिल चुके हैं। मुख्यमंत्री से आग्रह किया जा चुका है कि निगम को मिलने वाले पानी की नई दरों को वापस लिया जाए। इसके बाद भी निगम को बढ़े हुए रेट से बिल बीते दिनों आया था।

पंडित का इंतजार करते रहे मुकेश
गंज बाजार में भवन का उद्घाटन करने के लिए उपमुख्यमंत्री को पंडित का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री भी उनके साथ थे। इस दौरान दोनों नेताओं ने पंडित के आने का इंतजार किया और उद्घाटन स्थल पर खड़े रहे। बताया जा रहा है कि पंडित जल्दबाजी में पूजा की थाली लाना भूल गए थे। इस कारण उन्हें थाली लाने के लिए मंदिर जाना पड़ा।
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नेताओं की टोपी बन गई ट्रेड मार्क
अग्निहोत्री ने कहा कि नेताओं की टोपी ट्रेड मार्क बन गई है। टोपियों का विभाजन पार्टियों में भी हुआ। उन्होंने कहा कि एक बार पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह के साथ देश के दौरे पर थे। जब हम एयरपोर्ट पर पहुंचे तो उन्होंने मुझसे कहा कि हिमाचल में तो टोपी लगानी पड़ती है, यहां मैं एक बार उतार देता हूं।
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