संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बद्दी के अमरावती अपार्टमेंट में श्री राम कथा के चौथे दिन भगवान श्रीराम के राम विवाह की कथा सुनाई। कथा वाचक महाराज धरनी धर ने कहा कि भगवान श्री राम का विवाह कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था। राम विवाह का प्रसंग को तुलसीदास ने राम चरित्र मानस में लिखा था। उनके अनुसार भगवान राम सीता से विवाह से पहले जनकपुर की पुष्पवाटिका में मिल चुके थे। जनकपुर वर्तमान में नेपाल में स्थित है। भगवान श्री राम व लक्ष्मण गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से वाटिका से फूल लेने गए थे। वहां पर माता सीता पहले से ही वाटिका में मौजूद थी। जब राम व सीता ने एक दूसरे को देखा तो वह एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो गए। सीता माता ने उसी क्षण राम को पति के रूप में स्वीकार कर लिया था। माता सीता को इस बात की चिंता थी कि पिता राजा जनक की ओर से रखी गई शर्त किसी ओर से पूरा कर लिया तो श्री राम उनके पति प्राप्त नहीं होंगे। जब स्वयंवर से सभी बड़े योद्धा भगवान शिव का धनुष नहीं उठा पाए तो गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से श्री राम ने धनुष उठाया और उसके टुकड़े कर दिए।