भटोली कलां में शिव मंदिर में आयोजित भागवत कथा का श्रवण करते हुए स्थानीय लोग- स्रोत- ग्रामीण।
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। भटोलीकलां पंचायत के तहत शिव मंदिर बौनी, बद्दी में चल रही साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन राजा परीक्षित के जीवन प्रसंग को विस्तार से सुनाया गया। व्यास मंच को अलंकृत करते हुए सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉक्टर नरोत्तम दत्त शर्मा ने कथा का वाचन किया। कथावाचक ने बताया कि राजा परीक्षित ने अपने दादा भीम का जीता हुआ मुकुट सिर पर धारण करके शिकार के लिए निकले। मुकुट पहनते ही राजा परीक्षित पर कलियुग का वास हो गया। कलियुग के प्रभाव में आकर, राजा ने पहले एक ऋषि का अनादर किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अभिशाप मिला। इस शाप से मुक्ति और बचाव के लिए राजा परीक्षित ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। कथा में बताया गया कि इस कथा के श्रवण मात्र से ही मृत्यु के भय से छुटकारा मिलता है और जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है।डॉ. नरोत्तम दत्त शर्मा ने मधुर मांगलिक श्लोकों से मंगलाचरण करते हुए मुख्य यजमान रामेश्वर दास शर्मा और सभी भक्तों के कल्याण की कामना की। उन्होंने भगवत शब्द के अर्थ को प्रकाशित करते हुए बताया कि भागवत किस प्रकार भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के द्वारा इस संसार रूपी सागर से पार लगा देती है, अर्थात जीव को मोक्ष का अधिकारी बना देती है। कथावाचक ने बताया कि ऋषि शौनक द्वारा सूत जी महाराज से पूछे गए 6 प्रश्नों के उत्तर ही 18000 श्लोकों, 335 अध्यायों और 12 स्कंधों के रूप में इस दिव्य संहिता का आधार बने।