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Solan News: श्रीमद्भागवत कथा में बालक ध्रुव की कथा का वर्णन

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कुनिहार के कोठी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मौजूद श्रद्धालु। संवाद - फोटो : गंगा नगर ​स्थित ककरऊ कोठी फीडर पर स्मार्ट मीटर को लेकर हंगामा करती महिलाएं। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुनिहार (सोलन)। क्षेत्र के गांव कोठी में कुर्गण देव सेवा समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ। कथावाचक आचार्य हेमंत भारती ने इस अवसर पर बालक ध्रुव के जीवन और उनके अद्भुत तपस्या का वर्णन किया। आचार्य ने बताया कि ध्रुव महाराज राजा उत्तानपाद की रानी सुनीति के पुत्र थे। उनके पिता की गोद में बैठने के प्रयास पर उनकी सौतेली माता सुरुचि ने उन्हें रोक दिया। अपमानित होकर ध्रुव अपनी माता के पास गए। माता ने उन्हें भगवान विष्णु की शरण में जाने और धैर्य रखने की सलाह दी। ध्रुव ने भगवान विष्णु को प्राप्त करने का निश्चय कर वन की ओर प्रस्थान किया। मार्ग में नारद मुनि से मिलने के बाद उन्होंने कठोर तपस्या और ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करना शुरू किया। उनकी तपस्या इतनी प्रभावशाली थी कि देवता भी आश्चर्यचकित हो उठे। अंततः भगवान विष्णु उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन दिए। भगवान ने उन्हें एक अचल स्थान देने का वरदान दिया, जिसे आकाश में ध्रुव तारे के रूप में स्थिर रखा गया। ध्रुव महाराज ने फिर राज्य लौटकर धर्मपूर्वक शासन किया और अंततः परमधाम को प्राप्त हुए।
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