चूहूवाल में कथा का आनंद लेते श्रद्धालुस्रोत: संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। चूहूवाल शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन व्यासपीठ आचार्य राकेश गर्ग ने कथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं, कंस वध और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग सुनाए। आचार्य राकेश गर्ग ने बताया कि जब कंस भगवान कृष्ण को गोकुल में मारने में असफल हुआ, तो उसने अक्रूर को भेजकर कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाया और उन्हें मारने के विभिन्न उपाय किए, लेकिन अंततः भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर दिया और अपने नाना उग्रसेन तथा माता-पिता को कारागार से मुक्त किया। रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य ने बताया कि राजा भीष्मक ने अपने पुत्र रुक्म के कहने पर रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से तय कर लिया था। रुक्म शिशुपाल का खास मित्र था, इसलिए वह अपनी बहन का विवाह उससे कराना चाहता था, जबकि रुक्मिणी ने मन से श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था। रुक्मिणी ने कृष्ण को संदेश भेजा और कृष्ण विदर्भ से आए। विवाह के दिन जब शिशुपाल द्वार पर उपस्थित हुआ, तब कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर लिया। रुक्म ने अपने सैनिकों के साथ कृष्ण का पीछा किया, लेकिन श्रीकृष्ण ने युद्ध में विजय पाई और रुक्मिणी को लेकर द्वारिका लौट आए। इसके बाद दोनों का विवाह संपन्न हुआ।