भारत के खिलाफ चीन की गतिविधियों का असर मेड इन चाइना के उत्पादों की मार्केट पर साफ दिखने लगा है। मेक इन इंडिया के स्लोगन को फॉलो करते हुए खरीदारों से लेकर कारोबारियों ने चीन में बने उत्पादों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। आलम यह है कि दीवाली में जहां पहले चीन की स्वीट्स, कैंडी, लाइटों और पटाखों से बाजार अटे पड़े होते थे, वैसा इस बार खास माहौल नहीं है।
चाइना मार्केट हालांकि सजी पड़ी है लेकिन वहां खरीदारों की कमी खल रही है। लोग भारत में बने उत्पादों की डिमांड कर रहे हैं, वहीं कारोबारी भी भारतीय उत्पादों को ही प्रमोट करने में जुटे हैं। इलेक्ट्रानिक उत्पादों में चीन के बने देशी मोबाइल बंद हो चुके हैं लेकिन ब्रांडेड चाइनिज मोबाइल कंपनियों की मार्केट बरकरार है। चाइना के सामान के सोलन में स्टॉकिस्ट और थोक विक्रेता नहीं हैं। लेकिन यह सामान चंडीगढ़ या दिल्ली से आता है।
50 फीसदी तक गिरा चाइना कारोबार
कारोबारियों के मुताबिक चीन के उत्पादों के बाजार में 50 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। आनलाइन शापिंग ने भी इस ट्रेंड को तोड़ने की कोशिश की है। रेडिमेड और शूज आदि में लोकल प्रोडक्ट्स काफी चल रहे हैं। स्वीट्स और कैंडी का चाइनीज कारोबार तो लगभग जीरो ही हो चुका है।
कारोबार का किया बहिष्कार
सोलन मालरोड पर स्वीट्स और कैंडी का कारोबार करने वाले शिव वैकर्स के मुकेश गुप्ता ने कहा कि उनका चाइनीज स्वीट्स कैंडी का कारोबार काफी अधिक था। लेकिन अब भारत के खिलाफ चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए और ग्राहकों की कम डिमांड को देखते हुए चाइना का सामान बेचना बंद कर दिया है। मोबाइल और गैजेट्स डील करने वाले मुकेश शर्मा ने कहा कि देसी चीन उत्पादों की मार्केट बंद है। लेकिन अभी भी चाइना के ब्रांडेड मोबाइल की मार्केट में अच्छी डिमांड है।
तो इसलिए खरीद की बंद
खरीदारों में अनिल कुमार, हेमंत सिंह और दीपक शर्मा ने कहा कि उन्होंने चीन का सामान खरीदना बंद कर दिया है। यह देश भारत के खिलाफ पाकिस्तान से हाथ मिला रहा हो उसका सामान भारतीय क्यों खरीदें? उन्होंने अन्य लोगों से भी चीन के माल का बहिष्कार करने की अपील की है।
सस्ते के बावजूद नहीं खरीद रहे लोग
चाइना का सामान देखने में सुंदर, सस्ता और इसका प्रयोग करना आसान होता है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खासे सस्ते होते हैं। यह काफी एडवांस तकनीक के होते हैं। यह अन्य उत्पादों से 50 से 60 फीसदी तक सस्ते होते हैं। लिहाजा इनकी डिमांड खासी होती है। लेकिन अब इनकी डिमांड कम होने लगी है।