सोलन के कोठी देवरा स्कूल में उगाई गई ढिंगरी मशरूम को मिड-डे-मील में बच्चों को बांटते हुए। स्रोत
- फोटो : राखीगढ़ी में अपने पुश्तैनी हवेली में ग्रामीणों के साथ मंत्री राजेश अग्रवाल। स्रोत : जागरूक पाठक
व्यावसायिक शिक्षा के तहत विद्यार्थियों को मिल रही कृषि तकनीक और स्वरोजगार की सीख
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कोठी देवरा में व्यावसायिक शिक्षा के तहत ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम उत्पादन की पहल शुरू की गई है। विद्यालय में विद्यार्थियों को दी जा रही यह व्यावहारिक शिक्षा उन्हें कृषि तकनीक से जोड़ने के साथ आत्मनिर्भर और स्वरोजगार के लिए तैयार कर रही है। वोकेशनल ट्रेनर नेहा वर्मा के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने अब तक करीब आठ किलोग्राम ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन किया है। इस मशरूम का उपयोग विद्यालय के मिड-डे मील में किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार मिल रहा है। साथ ही छात्र मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया भी सीख रहे हैं। नेहा वर्मा ने फरवरी 2026 में उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग की ओर से भारती एयरटेल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित शिक्षक एक्सपोजर कार्यक्रम के तहत मशरूम अनुसंधान निदेशालय, चंबाघाट से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने अपने विद्यालय के साथ-साथ अन्य स्कूलों के शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया, जिसके परिणामस्वरूप सोलन के कई विद्यालयों में मशरूम उत्पादन शुरू हुआ है। विद्यालय के प्रधानाचार्य शिव प्रभाकर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत विद्यार्थियों को कौशल आधारित और अनुभवात्मक शिक्षा से जोड़ना जरूरी है। मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियां छात्रों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने इस पहल को विद्यार्थियों के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
सोलन के कोठी देवरा स्कूल में उगाई गई ढिंगरी मशरूम को मिड-डे-मील में बच्चों को बांटते हुए। स्रोत- फोटो : राखीगढ़ी में अपने पुश्तैनी हवेली में ग्रामीणों के साथ मंत्री राजेश अग्रवाल। स्रोत : जागरूक पाठक