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Solan News: सोलन का तापमान पांच दिनों से लगातार 37 डिग्री पार, 1990 में पड़ी थी इस तरह की गर्मी

Fri, 31 May 2024 11:49 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
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जिले में गर्मी ने इस बार तोड़ा पिछले 34 वर्षो का रिकॉर्ड
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नौणी विवि ने भी किसान-बागवानों को एडवाइजरी की जारी
मौसम में हो रहा यह बदलाव बताया जा रहा चिंताजनक
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी से पिछले चार दिनों से तापमान 37 डिग्री से ऊपर चल रहा है। पांचवें दिन शुक्रवार को भी सोलन का तापमान 38.4 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 1990 में सोलन में इस तरह की गर्मी पड़ी थी। वहीं अब 34 वर्षों के बाद लगातार पांच दिनों से सोलन का तापमान स्थिर चल रहा है। विशेषज्ञ मौसम में हो रहे इस बदलाव को चिंताजनक बता रहे हैं। नौणी विवि भी ने भी इसके लिए किसान-बागवानों को एडवाइजरी जारी कर दी है।
जानकारी के अनुसार जिले में पड़ रही भीषण गर्मी से न केवल लोग परेशान हैं बल्कि जंगली जानवर व पशु भी त्रस्त हो रहे हैं। हर बार मौसम कुछ न कुछ नए रिकार्ड दर्ज कर रहा है। मौसम का यह बदलाव मौसम विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। सोमवार से शुक्रवार तक अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इसके अलावा न्यूनतम तापमान भी बढ़कर 21.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। हालांकि इससे पहले भी जिले में 38 डिग्री से अधिक तापमान गया है। मगर इतना तापमान होते ही बारिश हो जाती थी, जिससे तापमान फिर से कम हो जाता था। अभी आने वाले दिनों में भी बारिश कम होने की उम्मीद नहीं है। 1 जून को जिला में कहीं-कहीं हल्की व मामूली बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।
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इनसेट
गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड
नौणी विवि के मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके भारद्वाज ने बताया कि पिछले पांच दिनों से यहां का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया जा रहा है। शुक्रवार को भी तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस रहा। तापमान ने पिछले 34 वर्षों का रिकार्ड तोड़ दिया है। 1 जून को जिला में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।
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इनसेट
किसानों को दी ये सलाह
किसानों को सीधे गर्मी के संपर्क से बचने, ठंडा रहने, निर्जलीकरण से बचने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी है। किसान सुबह और देर शाम आवश्यकता अनुसार फसलों की सिंचाई करें। मौजूदा मौसम की स्थिति में नए कीटों के उद्भव के लिए फसल की नियमित निगरानी करें। टमाटर के पौधों की स्टेकिंग करें। (पौधों को धागों से बांधें ) और टमाटर के खेतों में मिट्टी की नमी बनाए रखें। फसलों में तना और फल छेदक कीट से फसल की निगरानी करें।
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