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Agriculture Alert: सोलन में मशरूम पर कोवेव रोग का खतरा, 20 फीसदी फसल नुकसान की आशंका

Sun, 02 Aug 2026 01:32 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।

सार

बारिश और बढ़ी हुई नमी के कारण मशरूम उत्पादकों की चिंता बढ़ गई है। बटन और ढिंगरी मशरूम में क्लेडोबोट्रियम फंगस से होने वाले कोवेव रोग का प्रकोप बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में करीब 20 फीसदी मशरूम फसल प्रभावित होने की आशंका है। खुंब निदेशालय सोलन के विशेषज्ञ उत्पादकों को नमी नियंत्रित रखने और शुरुआती लक्षण दिखते ही रोकथाम के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
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मशरूम - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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बारिश और हवा में बढ़ी नमी ने मशरूम उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। अत्यधिक नमी के कारण बटन और ढिंगरी मशरूम में क्लेडोबोट्रियम फंगस का प्रकोप बढ़ रहा है। इसे कोवेव रोग के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी के चलते देशभर में अब तक करीब 20 फीसदी मशरूम की फसल खराब होने की आशंका है । रोग तेजी से फैलने के कारण नए उत्पादकों के सामने पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा बना हुआ है।

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डीएमआर के विशेषज्ञ डॉ. अनिल ने बताया कि बरसात के मौसम में मशरूम बैग में जरूरत से ज्यादा नमी बनी रहना इस रोग का प्रमुख कारण है। रोग की चपेट में आने पर मशरूम के ऊपर रुई जैसी सफेद फंगस जमने लगती है। इसके बाद स्वस्थ मशरूम भी सड़ना शुरू हो जाते हैं। संक्रमण तेजी से एक मशरूम से दूसरे तक फैल सकता है। ऐसे में समय रहते रोग की पहचान और रोकथाम जरूरी है।

भारत में प्रतिवर्ष करीब 2.50 लाख मीट्रिक टन बटन मशरूम और लगभग 50 हजार मीट्रिक टन ढिंगरी मशरूम का उत्पादन होता है। बारिश के इस मौसम में हिमाचल प्रदेश समेत उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड के उत्पादक रोजाना फोन और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से खुंब निदेशालय सोलन के विशेषज्ञों से संपर्क कर रहे हैं।
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रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल ने उत्पादकों को सलाह दी है कि बरसात के मौसम में मशरूम उत्पादन इकाई में नमी के स्तर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत रोकथाम के उपाय अपनाने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।

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निदेशालय कर रहा उत्पादकों को जागरूक
खुंब निदेशालय के कार्यकारी निदेशक डॉ. बीआर अत्री ने बताया कि बरसात के दौरान मशरूम में कोवेव रोग का प्रकोप बढ़ जाता है। इस बार सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण नुकसान का दायरा बढ़ा है। उत्पादकों को रोग से बचाव के प्रति जागरूक करने के लिए निदेशालय की ओर से समय-समय पर एडवाइजरी जारी की जा रही है।
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