रतवाड़ी में राजा परीक्षित की सुनाई कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। रतवाड़ी पंचायत के शिव मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत पुराण कथा के दूसरे दिन राजा परीक्षित की कथा सुनाई। आचार्य वासुदेव गर्ग ने बताया कि राजा के मुकुट में कलियुग प्रविष्ट कर गया। राजा वन में आखेट के लिए गया तो उन्हें वहां प्यास लगी।
रास्ते में ऋषि शमीक का आश्रम मिला। राजा ने पानी मांगा। ऋषि तपस्या में लीन थे इसलिए उन्हें पता नहीं चला। परीक्षित ने इसे अपना अपमान समझा और एक मेरे हुए सांप को ऋषि के गले में डाल दिया। जब ऋषि पुत्र श्रृंगी ने आकर देखा तो उसे क्रोध आ गया। हाथ में जल लेकर श्राप दिया कि जिसने मेरे पिता के गले में मृत सर्प डाला है, सात दिवस के भीतर ही तक्षक नाम का सांप उसे डस कर मृत्युलोक पहुंचा दे।
ऋषि को पुत्र के श्राप पर दुख हुआ। उन्होंने एक शिष्य से परीक्षित को श्राप का समाचार भेजा। इससे कि वे सतर्क रहें। परीक्षित ने ऋषि के श्राप को अटल समझ अपने पुत्र जनमेजय को शासक पद पर प्रतिष्ठित कर दिया और स्वयं ऋषियों के परामर्श अनुसार जीवन के शेष सात दिनों तक ऋषि व्यास के पुत्र शुकदेव से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। इससे वे मृत्यु के भय से मुक्त हो गए।