संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ उपमंडल के गांव रत्योड़ में एक सप्ताह से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ डॉ. नरोत्तम दत्त ने सुदामा चरित का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा अत्यंत निर्धन था। भगवान श्रीकृष्ण उसके बाल सखा थे। अपनी पत्नी सुशीला के बार-बार कहने पर अपने मित्र से मिलने द्वारका पहुंचे तो द्वारपालों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया किंतु जब कृष्ण को उसके आने की खबर मिली तो वे नंगे पांव ही दौड़ पड़े और उसे आदर पूर्वक अंदर महल में ले गए और सिंहासन पर बिठा कर स्वयं चरण धोए। बिना बताए ही सुदामा की सारी निर्धनता दूर कर दी। कथा के बाद भंडारे का आयोजन किया गया,जिसमें लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।