बसोट में कृष्ण जन्म पर झूमते श्रोतास्रोत: संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। उपमंडल के बाड़ा बसोट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास आचार्य भगवान दास शास्त्री ने श्रद्धालुओं को समुद्र मंथन और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग सुनाकर निहाल किया। कथा के दौरान भगवान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। आचार्य ने समुद्र मंथन की व्याख्या करते हुए बताया कि जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया, तो उसमें से 14 अनमोल रत्न निकले। इनमें अमृत सबसे महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि अमृत के लिए हुए संघर्ष के दौरान पृथ्वी पर चार स्थानों प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में अमृत की बूंदें गिरी थीं। यही कारण है कि इन पवित्र स्थानों पर हर 12 वर्ष में कुंभ मेले का आयोजन होता है। कथा में बताया गया कि भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पान कराया। युद्ध के दौरान कालनेमि दैत्य का वध हुआ, जिसने द्वापर युग में राजा उग्रसेन के घर कंस के रूप में जन्म लिया। जब कंस के पापों से धरती मां व्याकुल हुई, तब भगवान नारायण ने कृष्ण अवतार लेकर पृथ्वी को पाप मुक्त करने का संकल्प लिया। कथा के यजमान प्रकाश सैनी ने बताया कि कथा 29 मार्च से प्रतिदिन दोपहर 2:00 से सायं 5:00 बजे तक चल रही है और पूर्णाहुति 5 अप्रैल को होगी, उसी दिन भंडारे का आयोजन भी होगा।