रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से जगमग हुआ गर्भगृह, सुरक्षा के चाकचौबंद इंतजाम
शारदीय नवरात्र को लेकर सज गए जिलेभर के मंदिर
पुष्पलता शांडिल्य
सोलन। शारदीय नवरात्र को लेकर जिलेभर के मंदिर सज गए हैं। शहर के प्रमुख शक्तिपीठ मां शूलिनी मंदिर और मुरारी मार्केट स्थित दुर्गा माता मंदिर को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया है। रविवार को घट स्थापना के साथ नौ दिवसीय नवरात्र पर्व शुरू होगा। मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और दर्शन के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
मां शूलिनी मंदिर में श्रद्धालु सुबह पांच बजे से दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं की आवाजाही रहने तक मंदिर के कपाट खुले रहेंगे। मंदिर परिसर में 24 घंटे सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा दिन के समय एक महिला और एक पुरुष सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं को कतारों में दर्शन करवाए जाएंगे।
शूलिनी कारदार समिति के अध्यक्ष ठाकुर शेर सिंह ने बताया कि नवरात्र के दौरान सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाता है, जबकि दर्शन सुबह पांच बजे से होंगे। इससे पहले गर्भगृह की सफाई और पूजा की जाएगी। सुबह आठ से दस बजे तक विशेष पूजा होगी, जबकि शाम पांच बजे दूसरी पूजा की जाएगी। नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन भी होंगे। दशहरे के दिन विशेष हवन किया जाएगा।
दूसरी तरफ राम मंदिर, जटोली, मां दुर्गा मंदिर चंबाघाट और लक्ष्मी नारायण मंदिर धर्मपुर सहित जिले के अन्य मंदिरों में भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिरों में देवी की मूर्तियों का नए वस्त्रों और आभूषणों से श्रृंगार किया गया है।
नवरात्र के सामान से सजे बाजार
नवरात्र को लेकर शहर के बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। दुकानों पर माता की चुनरियां, वस्त्र, प्रसाद और पूजा सामग्री उपलब्ध है। कन्या पूजन के सामान की भी खरीदारी हो रही है। विक्रेता अंजली ने बताया कि मां शूलिनी के लिए विशेष वेलवेट के वस्त्र एक हजार से दो हजार रुपये तक में उपलब्ध हैं। इन पर जरी, गोटे और मोतियों का काम किया गया है। प्रसाद 20 से 100 रुपये तक और पंचमेवा प्रसाद 40 रुपये में उपलब्ध है।
पहले नवरात्र पर होगी मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाएगी। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल का पुष्प है। वृषभ पर सवार मां शैलपुत्री को शक्ति, धैर्य और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
सोलन शहर के मां शूलिनी मंदिर में नवरात्रों को लेकर लगाई गई लाइटें। संवाद