सोलन। शहर के साथ लगते चामत-भड़ेच के गांव दयारशघाट में आयोजित श्रीमद्देवी भागवत कथा में मां भगवती के चौथे बीज चामुंडा का वर्णन किया। व्यासपीठ से आचार्य राहुल ने सभी को मातृ शक्ति का सम्मान करने का संदेश दिया, क्योंकि जहां नारी का सम्मान होता है वहां देवी-देवता वास करते हैं। उन्होंने माता सती के स्वरूप के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर मां भगवती का प्रथम अवतरण दक्ष पुत्री सती के रूप में हुआ। कठिन तपस्या के बाद सती का विवाह भगवान शिव के साथ हुआ। राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान कर दिया। इसके बाद दक्ष पुत्री ने अपने शरीर को हवन कुंड में स्वाहा कर दिया। इसी देह से सबसे पहले जो आत्म तत्व निकला वह हिमाचल प्रदेश के ज्वालाजी में स्थापित हुआ। ज्वालाजी में आज भी मां भगवती साक्षात रूप में विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि इसी ज्वालाजी की ज्योति इस यज्ञ में भी स्थापित की गई है, जिसके दर्शन मात्र से श्रद्धालु धन्य हो रहे हैं।