प्राकृतिक तथा मानव जनित आपदाओं से प्रभावी रूप से निपटने के लिए तैयारी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है।
- फोटो : अमर उजाला
प्राकृतिक तथा मानव जनित आपदाओं से प्रभावी रूप से निपटने के लिए तैयारी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है। बेहतर समन्वय ही आपदा के दौरान बड़ा बचाव साबित होता है। यह बात केंद्रीय गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के रिस्पांस डिविजन के प्रमुख कर्नल पीके पाठक ने सोलन में डीसी दफ्तर में इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम पर आयोजित कार्यक्रम में सोमवार को कही।
उन्होंने कहा कि भारत में विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं का खतरा सदा बना रहता है। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी रूप से निपटने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर गहन विचार-विमर्श के बाद आपदा प्रबंधन अधिनियम को तैयार किया गया। यह अधिनियम पूरे प्रदेश में लागू किया है। आपदाओं से निपटने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर अधिकारियों तथा कर्मचारियों को तैयार करने एवं त्वरित कार्रवाई बल को प्रशिक्षित करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल को देश के अन्य हिमालयी राज्यों के साथ विशेषकर भूकंप की दृष्टि से जोन-4 और जोन-5 में रखा है। इन जोन में आने वाले भूकंप कभी भी विनाशकारी सिद्ध हो सकते हैं।
रिस्पांस डिविजन के प्रमुख ने कहा कि विभिन्न आपदाओं के समय संसाधनों का उचित प्रयोग एवं कार्यरत एजेंसियों के मध्य समन्वय बहुमूल्य मानवीय जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है। विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से इस समय में मानवीय क्षति को काफी सीमा तक कम किया जा सकता है। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले अधिकारियों से आग्रह किया कि वे विभिन्न पाठ्यक्रमों एवं व्यवहारिक प्रशिक्षणों को सही प्रकार से समझें।
नियमित तैयारी ही बचाव : डीसी
डीसी राकेश कंवर ने मुख्यातिथि का स्वागत किया तथा इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। कहा कि भूकंप, बाढ़, भू-स्खलन, हिमस्खलन के साथ हिमाचल विभिन्न मानव जनित आपदाओं की दृष्टि से भी संवेदनशील है। कहा कि नियमित तैयारी के साथ आपदाओं से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है। अधिकारियों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण कार्यक्रम में दी जाने वाली जानकारी को व्यावहारिक रूप में अपनाएं। इस मौके पर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी संदीप नेगी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुशील शर्मा, लोक प्रशासन संस्थान से केवल राम सहजल समेत विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों ने शिरकत की।