बहु-वेंडर प्रणाली से विकास कार्यों में आ रही है दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। पंचायती राज संस्थाओं में शुरू की गई नई वेंडर प्रक्रिया का ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने इस प्रणाली में कई व्यावहारिक समस्याएं बताई हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से इसमें तुरंत संशोधन करने की मांग की है। वर्तमान व्यवस्था के तहत एक ही पंचायत में पांच से सात वेंडरों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। इस बहु-वेंडर प्रणाली से विकास कार्यों में भारी बाधा आ रही है। यदि कोई एक वेंडर समय पर सामग्री नहीं देता, तो पूरा काम रुक जाता है। इस प्रणाली में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी बढ़ रही है। कई पंचायतों में वेंडर केवल नाम के हैं। वे कमीशन लेकर फर्जी बिल देते हैं, जबकि सामग्री की आपूर्ति पंचायत प्रतिनिधि स्वयं करते हैं। ग्रामीणों ने इसकी तुलना मनरेगा में जॉब कार्ड के दुरुपयोग से की है। इसमें खाता किसी और का होता है और काम कोई और करता है। कई प्रतिनिधि नियमों को ताक पर रखकर अपने रिश्तेदारों को वेंडर बनवा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बहु-वेंडर प्रणाली से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सामग्री की आपूर्ति में देरी से परियोजनाएं रुक जाती हैं। इस व्यवस्था में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पनप रहा है। फर्जी वेंडर कमीशन लेकर बिल उपलब्ध कराते हैं। पंचायत प्रतिनिधि स्वयं सामग्री की आपूर्ति करते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता राज कुमार शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग की है। उन्होंने फर्जी वेंडरों को बाहर करने के लिए आवेदन के समय दो से तीन लाख रुपये की सिक्योरिटी लेने का सुझाव दिया। इस राशि पर एक साल बाद ब्याज मिलना चाहिए। कोटेशन के साथ वेंडर के जीएसटी नंबर की जांच होनी चाहिए। यह नंबर निर्माण सामग्री आपूर्ति का ही होना अनिवार्य है। उन्होंने एक पंचायत में केवल एक जवाबदेह वेंडर नियुक्त करने की भी मांग की है।