राज्य ड्रग नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि इस माह कुल 88 दवाओं के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, क्योंकि वे गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। उन्होंने कहा कि संबंधित कंपनियों को दोबारा लाइसेंस प्राप्त करने के लिए अपनी गुणवत्ता में सुधार करना होगा। उन्होंने बताया कि विभाग लगातार उद्योगों से सैंपल एकत्र कर जांच करता है, जिससे गुणवत्ता में कमी वाली दवाओं की पहचान हो सके। जिन दवाओं की गुणवत्ता सही नहीं पाई जाती, उन्हें विभाग सीडीएससीओ पोर्टल पर अपलोड कर देता है। डॉ. कपूर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे पोर्टल पर सूचीबद्ध खराब गुणवत्ता वाली दवाओं की खरीद से बचें। विभाग दवा निर्माताओं को गुणवत्ता सुधार के लिए समय भी देता है, जिसके बाद सुधार होने पर उत्पादन दोबारा शुरू किया जा सकता है।