प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ और बस व कार ऑपरेटरों ने बैठक कर जताया विरोध
कहा-अगर टोल टैक्स वापस नहीं हुआ तो प्रदेश भर में किया जाएगा आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। हिमाचल प्रदेश में टोल टैक्स दरों में हालिया वृद्धि के विरोध में हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ और कार ऑपरेटर कंफेडरेशन ऑफ इंडिया (राज्य इकाई) ने संयुक्त रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठनों का कहना है कि यह निर्णय निजी बस ऑपरेटरों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डालेगा और प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। बैठक की अध्यक्षता करते हुए बस एंड कार ऑपरेटर कंफेडरेशन ऑफ इंडिया के राज्य अध्यक्ष मनोज राणा ने बताया कि टोल टैक्स में बढ़ोतरी 180 से 600 रुपये तक हो जाएगी। इससे निजी बस संचालकों के लिए मासिक एंट्री टोल लगभग 18,000 रुपये तक पहुंच जाएगा, जो छोटे और मध्यम ऑपरेटरों की आर्थिक स्थिति को कमजोर करेगा। उन्होंने बताया कि अन्य करों में वृद्धि पहले से ही हुई है। उदाहरण के लिए, स्पेशल रोड टैक्स औसतन 9,000 से 15,000 रुपये तक है, डीजल पर वैट में पिछले तीन वर्षों में प्रति लीटर लगभग 6 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, और टोकन टैक्स व बस अड्डों पर प्रतिदिन 200 से 500 रुपये अड्डा शुल्क देना पड़ता है। इस बैठक में बस एंड कार ऑपरेटर कंफेडरेशन के राज्य अध्यक्ष मनोज राणा, उपाध्यक्ष ओम प्रकाश ठाकुर, नसीब सैनी, स्टेज कैरिज बस यूनियन नालागढ़ के प्रधान कुलतार सिंह ठाकुर, बीबीएन पैसेंजर्स समिति के प्रधान जितेंद्र ठाकुर, तरसेम चौधरी, हरदीप ठाकुर, कुलदीप सैनी, प्रेम चौधरी और बाली ठाकुर तथा हरी सिंह विजयपाल ने भाग लिया।
कॉरिडोर मार्गों पर हो रही एंट्री टैक्स की अव्यावहारिक वसूली : राणा
मनोज राणा ने कहा कि कुछ कॉरिडोर मार्गों पर एंट्री टैक्स की अव्यावहारिक वसूली हो रही है। उदाहरण स्वरूप ऊना-जसूर (वाया तलवाड़ा), जसूर-ढांगू (वाया पठानकोट), बद्दी से सोलन वाया खुदाबक्ष और कालका जैसे मार्ग। उन्होंने सरकार से मांग की कि हिमाचल प्रदेश में निजी बसों से एंट्री पर टोल टैक्स की वसूली तत्काल प्रभाव से बंद की जाए।
टोल और एंट्री टैक्स से पूर्ण छूट दी जाए
मनोज राणा ने कहा कि कॉरिडोर परमिट पर संचालित बसों को टोल और एंट्री टैक्स से पूर्ण छूट दी जाए और परिवहन नीति निर्धारण में निजी बस ऑपरेटरों से संवाद स्थापित कर व्यावहारिक और संतुलित समाधान निकाला जाए। ऑपरेटरों ने चेतावनी दी कि यदि यह निर्णय शीघ्र वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश भर के निजी बस ऑपरेटर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।