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Solan News: दवा कंपनी के खिलाफ एनजीटी में याचिका स्वीकार

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पलासड़ा, दतोवाल और नंगल के ग्रामीणों को राहत की उम्मीद
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। नालागढ़ के पलासड़ा स्थित एक दवा कंपनी की ओर से फैलाए जा रहे प्रदूषण के खिलाफ अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण में कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। एनजीटी ने पर्यावरण प्रेमी धर्मेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिस पर शुक्रवार को पहली सुनवाई होगी। इस कदम से पलासड़ा, दतोवाल और नंगल गांव के ग्रामीणों को वर्षों पुरानी प्रदूषण की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। सेरी गांव के निवासी पर्यावरण प्रेमी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन व संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। 20 फरवरी का मामला दवा कंपनी से जुड़ा एक टैंकर औद्योगिक अपशिष्ट जल ले जाते पकड़ा गया था, जिस पर नालागढ़ थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि, पुलिस जांच किस स्तर पर है और दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई, यह आज तक स्पष्ट नहीं किया गया।
इनसेट
एसडीएम बैठक में उजागर हुई थीं कमियां
27 मार्च को एसडीएम नालागढ़ की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रशासन ने स्वयं माना था कि कंपनी के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं। बैठक के दौरान निम्नलिखित गंभीर मुद्दे इलाके में तेज दुर्गंध, अत्यधिक भूजल दोहन और नियम विरुद्ध संचालन सामने आए थे। इसके अलावा कंपनी का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट उसकी उत्पादन क्षमता के हिसाब से काफी छोटा व अपर्याप्त है। कंपनी परिसर में कई बोरवेल बिना आवश्यक अनुमति के चलाए जा रहे हैं।
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कार्रवाई न होने पर एनजीटी का रुख
बैठक के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नियमित निरीक्षण करने, कंपनी का उत्पादन सीमित करने और संबंधित विभागों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब एनजीटी में याचिका स्वीकार होने के बाद तीनों प्रभावित गांवों के लोगों को उम्मीद है कि अदालत के हस्तक्षेप से उन्हें इस प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम से स्थायी मुक्ति मिलेगी।
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