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पीजी और व्यावसायिक संस्थानों के लिए अलग होगा टैक्स

Sun, 11 Dec 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो, सोलन
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अवैध रूप से चले रहे पीजी और व्यावसायिक संस्थान नगर परिषद के निशाने पर हैं। टैक्स से बचने के लिए शहर में बड़े पैमाने पर चल रहा यह कारोबार जल्द टैक्स के दायरे में आएगा। नगर परिषद के भौगोलिक जांच सर्वेक्षण (जीआईएस सेटेलाइट मेपिंग) से यह संभव होगा। इसका सर्वे पूरा होने के बाद आगामी वित्त वर्ष में शुरू होना है। इसमें हर भवन के मासिक बिजली और पानी के बिलों का डाटा फीड किया है।
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बिल्डिंग में तय सदस्यों के हिसाब से अगर बिजली पानी की खपत अधिक आई तो उस हिसाब से सेनिंटेशन टैक्स लगाया जाएगा। जीआईएस के तहत इस कवायद को अंजाम दिया जा रहा है। हालांकि अब तक यह योजना लागू हो जानी चाहिए थी लेकिन अब जीएसआई इस वित्त वर्ष तक इसे शुरू करने की बात कर रहे हैं। इससे ऐसे भवन मालिकों का आसानी से पताया लगाया जा सकेगा जो अपने घरों में पीजी चला रहे हैं, या घरेलू परिसर में व्यावसायिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

सामान्य टैक्स दे रहे
सोलन में कई निजी कॉलेज और यूनिवर्सिटी हैं। इनमें हजारों छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। सैकड़ों छात्र पीजी के तौर पर रह रहे हैं। छात्रों और नौकरी पेशा लोगों से पीजी मालिक हजारों रुपये ले रहे हैं। लेकिन नगर परिषद द्वारा ऐसे भवन मालिकों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने पाने में नाकाम साबित हो रही है। आलम यह है कि एक बहुमंजिला भवन में 50 से अधिक लोग रहे रहे हैं। नगर परिषद को यह अन्य लोगों की तरह सामान्य टैक्स दे रहे हैं। इससे नगर परिषद को हर माह लाखों का चूना लग रहा है।
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कैसे करेगा जीआईएस कार्य
जीआईएस प्रोजेक्ट आफिसर जमील अहमद ने बताया कि भौगोलिक जांच सर्वेक्षण में आवासीय और व्यावसायिक तौर पर उपयोग किए जाने वाले पानी तथा बिजली की औसत खपत का एक महीने का डाटा फीड किया जाएगा। इस तरह यह पहचान पाने में आसानी होगी कि भवन मालिक के परिवार के सदस्यों के अतिरिक्त वहां कितने लोग रहते हैं। इसी के आधार पर नप जांच को आगे बढ़ा सकती है।

टैक्स लगाना होगा आसान : गुप्ता
नगर परिषद अध्यक्ष पवन गुप्ता ने कहा कि शहर में बढ़ रहे पीजी मालिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर जीआईएस के बाद टैक्स लगाने में नगर परिषद को आसानी होगी। ऐसे भवन मालिकों पर भी शिकंजा कसा जा सकेगा जो परिषद को हर माह लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीएसआई अब तक शुरू हो जाना चाहिए था लेकिन कुछ कारणों के चलते यह शुरू नहीं हो सका है। अब आगामी वित्त वर्ष में यह शुरू हो सकता है।
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