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बच्चों में कीटनाशक बन रहा कुपोषण का कारण : डॉ. निशा

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आयुर्वेदिक अस्पताल सोलन में आयोजित जांच एवं जागरूकता शिविर में अभिभावकों को पोषण की जानकारी देत
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जिला स्तरीय जागरूकता शिविर में विशेषज्ञों ने खानपान और स्वास्थ्य की दी जानकारी
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जिला स्तरीय शिविर में बच्चों और अभिभावकों की हुई निशुल्क स्वास्थ्य जांच
महिलाओं को पारंपरिक पोषण की दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सब्जियों और फलों में हानिकारक कीटनाशक के उपयोग छोटे बच्चों में कुपोषण का कारण है। ऐसे फलों और सब्जियों के सेवन से पुरुषों में कमजोर शुक्राणू बन रहे हैं। ऐसे शुक्राणुओं से पैदा होने वाले बच्चों में शुरुआत से ही कुपोषण के लक्षण दिखाई देते हैं।
फलों में छिड़के जाने वाले कीटनाशक कीट और कीटाणुओं का मारने का काम करते हैं और मानव शरीर में कई कीटाणु लाभदायक भी होते हैं, लेकिन इन पेस्टिसाइड वाले फलों के सेवन के कारण वह कीटाणुओं में भी कमी आती है। ऐसे में लोगों में भी बीमारियां तेजी से फैलती है और ठीक होने में अधिक समय लगता है।
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महिला एवं बाल विकास विभाग और आयुष विभाग सोलन की ओर से शनिवार को कुपोषण के प्रति पहला जिला स्तरीय जांच और जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिलेभर से 0 से 6 वर्ष तक के 66 बच्चों के साथ अभिभावकों ने भाग लिया। इस दौरान सभी बच्चों समेत उनकी माता और पिता के स्वास्थ्य की भी निशुल्क जांच की गई। जांच के बाद सभी को आवश्यकतानुसार निशुल्क दवाएं दी गईं। इस दौरान महिलाओं के साथ आयुष अधिकारियों ने बात की और उन्हें कुपोषण और बीमारियों के होने के कई कारणों के बारे में जानकारी दी।
जिला आयुष अधिकारी डॉ. निशा वर्मा पंवर ने बताया कि बच्चों में कुपोषण का कारण खानपान के अलावा घर का माहौल और माता-पिता की सेहत भी है। उन्होंने कहा कि कुपोषण को आयुर्वेदिक और पारंपरिक माध्यमों का उपयोग कर आसानी से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि एलोपैथिक दवा से भी कुपोषण को ठीक किया जा सकता है, लेकिन इसके कई साइड इफैक्ट्स भी हो सकते हैं। आयुर्वेदिक माध्यमों से उपचार के बाद किसी को साइड इफैक्ट्स नहीं होते हैं। शिविर के दौरान आयुष विभाग के डॉक्टरों की टीम के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग के पदाधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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13 बच्चों में एनिमिया की कमी
शिविर में हुई बच्चों की जांच में 13 बच्चों में एनिमिया की कमी पाई गई। डॉक्टरों ने बताया कि इसका कारण सही खानपान न मिलना है। बच्चों को आवश्यकता के अनुसार दवाएं दे दी गई हैं। शिविर में दूर से भी लोग आए हैं। उन्हें दवाएं देकर भविष्य में नजदीकी आयुष केंद्र में जाकर डॉक्टरों की सलाह लेने के लिए कहा गया है।
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