सोलन। कालका-शिमला नेशनल हाईवे पांच तंबूमोड़ के समीप बंद होने जाने से बने विकट हालातों के बीच यात्री और पर्यटक दिक्कतों में घिरे रहे। सड़क का एक हिस्सा ढहने और पहाड़ी वाली लेन में भूस्खलन के कारण नेशनल हाईवे 16 घंटे पूरी तरह से बंद रहा। हाईवे से किसी भी वाहन की आवाजाही न होने पर लोगों ने पैदल सफर करना शुरू कर दिया। धर्मपुर से परवाणू तक करीब 22 किलोमीटर तक लोग पैदल चले।
मौके पर कोरोनाकाल के लॉकडाउन जैसे हालात बनते दिखे। कोरोना लॉकडाउन के दौरान भी लोग हाईवे से पैदल अपने घरों की ओर निकले थे। इस दौरान कई लोग ऐसे थे जिन्होंने या तो आगरा जाना था या फिर चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा, बिहार जाना था।
वहीं, कई लोगों की गंतव्य की ओर जाने के लिए चंडीगढ़ से अग्रिम बुक की गईं ट्रेनें, फ्लाइट और बसें भी छूट गईं। लोग काफी परेशान दिखे और पुलिसकर्मियों से रास्ता खुलने की जानकारी बार-बार लेते रहे। कई पर्यटनों ने पुलिस कर्मचारियों से वाहनों के साथ आगे जाने का भी आग्रह किया। लेकिन, सड़क बंद होने के कारण अफरा-तफरी के अंदेशे से उन्हें आगे भी नहीं भेजा गया। पुलिसकर्मी वाहन चालकों और पर्यटकों समझाते रहे।
इसके बाद कई घंटे से कार में बैठे लोग और पर्यटक परेशान हो गए और सड़क खुलने का इंतजार करते रहे। कई पर्यटक शिमला से तीन दिन बाद सोशल मीडिया में नेशनल हाईवे पांच की स्थिति ठीक होने के बाद निकले थे। लेकिन ऐसे पर्यटक मंगलवार को धर्मपुर से सनवारा के बीच में दिनभर फंसे रहे।
वहीं पैदल चल रहे लोग पहाड़ों से गिरे पत्थर, मलबा, पेड़ देखकर काफी परेशान भी दिखाई दिए। वह डर के साये में अपने गंतव्य की ओर निकलते रहे। वाहनों की आवाजाही न चलने के कारण विकलांग लोग भी पैदल ही गंतव्य की ओर निकलें।
टोल प्लाजा पर ही शुरू कर दी पिकनिक
दोपहर 1:00 बजे तक आवाजाही शुरू न होने पर पर्यटकों ने टोल प्लाजा बरही पिकनिक मनाई उन्होंने ढाबे से खाना लेकर शनवारा टोल प्लाजा के सात सड़क किनारे खाना खाया और बाद में सड़क खुलने का इंतजार करते रहे हालांकि यहां से कुछ गाड़ियों को खुले स्थानों की ओर भी भेजा गया वहीं पंजाब में प्रशासनिक परीक्षा के भी कई छात्र जाम में फंसे रहे।