बीबीएन में वन्य प्राणी संपदा सुरक्षित नहीं है। आपात स्थिति में यदि संबंधित विभाग को सूचना देनी हो तो फोन घनघनाते रहते हैं लेकिन रिस्पांस नहीं मिलता।
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बीबीएन में वन्य प्राणी संपदा सुरक्षित नहीं है। आपात स्थिति में यदि संबंधित विभाग को सूचना देनी हो तो फोन घनघनाते रहते हैं लेकिन रिस्पांस नहीं मिलता। हो सकता है कि लैंड लाइन फोन खराब हो लेकिन अधिकारी मोबाइल भी नहीं उठाते। बुधवार को ऐसा ही वाक्या बरोटीवाला में सामने आया। जंगल से भटकते हुए एक जख्मी नीलगाय बरोटीवाला औद्योगिक क्षेत्र के रिहायशी क्षेत्र में घुस आया।
नीलगाय की गंभीर हालत देख स्थानीय लोग एकत्र हो गए। इसके बाद रेस्कयू के लिए वन विभाग से मदद मांगी गई। लेकिन वन विभाग से संपर्क नहीं हो सका। रेंजर आफिस का फोन खराब था और अफसर लोग फोन नहीं उठा रहे थे। आखिरकार लोगों ने नीलगाय के जख्मों पर मरहम लगाने और आवारा कुत्तों से बचाने की खुद ही मुहिम छेड़ी। वन विभाग के बजाय सूचना दमकल विभाग को दी गई। मौके पर पहुंची फायर बिग्रेड की टीम घायल नीलगाय को अपने कार्यालय ले गई। इसके बाद तहसीलदार बद्दी को सूचित किया। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचने तक दमकल विभाग को ही जानवर की देखरेख करने के निर्देश हुए।
बद्दी वन विभाग के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या टीम से संपर्क नहीं हुआ तो डीएफओ कुनिहार आरएस जसवाल के माध्यम से वन विभाग को घायल मादा नीलगाय की जानकारी दी। इसके बाद वन विभाग की टीम पहुंची और नीलगाय उनके सपुर्द की। अरण्यपाल अनिल जोशी ने कहा कि रेंज आफिसर बद्दी का फोन दुरुस्त करवाया जाएगा। फील्ड स्टाफ को भी व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं। वहीं करीब साढ़े तीन घंटे के बाद यह जीव वन विभाग के सुपुर्द हो पाया।
डेढ़ से दो घंटे तक की देखरेख
नीलगाय को समय पर प्राथमिक उपचार न मिलता तो उसकी जान जा सकती थी। कुत्ते उसे शिकार बना सकते थे। डेढ़ घंटे तक नीलगाय को ग्रामीणों और लोगों ने अपने पास रखा। इस दौरान उसके जख्मों पर हल्दी का लेप लगाकर उसे राहत देने का प्रयास किया गया। नीलगाय स्वयं खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। इसके बाद दमकल विभाग ने उसे वन विभाग के हवाले कर दिया।
सुबह छह बजे की घटना
जंगली मादा नीलगाय सुबह करीब 6:30 बजे बरोटीवाला के मंघाला रोड पर स्थानीय लोगों को घायल अवस्था में दिखा। इसे आवारा कुत्ते अपना शिकार बनाने के प्रयास में थे। दमकल विभाग अधिकार प्रकाश चंद, राजेश कुमार, डीडी ठाकुर, भाग सिंह, टेक चंद, तिलक कुमार और कुलदीप ने बताया कि विभाग के पास व्यवस्था न होने के कारण मादा नीलगाय को दमकल वाहन में ही लाना पड़ा। वन विभाग को दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। इसके बाद तहसीलदार बद्दी के निर्देशों पर घायल नीलगाय को दमकल कार्यालय ही लाना पड़ा।