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आवारा कुत्तों के आतंक पर शहर के लोग लामबंद

Thu, 04 May 2017 10:29 PM IST
सोलन, ब्यूरो
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जनवादी नौजवान सभा (डीवाईएफआई) सोलन की बैठक में शहर में आवारा कुत्तों के आतंक का मुद्दा छाया रहा। - फोटो : demopic
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जनवादी नौजवान सभा (डीवाईएफआई) सोलन की बैठक में शहर में आवारा कुत्तों के आतंक का मुद्दा छाया रहा। बैठक की अध्यक्षता सभा के संयोजक मोहित वर्मा ने की। इस दौरान सोलन के टैंक रोड पर बुधवार को आवारा कुत्तों का एक बच्ची पर हमला करने की घटना पर रोष जताया गया।
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साथ ही नगर प्रशासन से आवारा कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की गई। इसके साथ सभा ने चेताया कि अगर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो शहर में आंदोलन किया जाएगा। लोगों ने कहा कि आवारा कुत्तों और बंदरों के आतंक से हर कोई परेशान हैं। कुत्तों की बढ़ती तादाद के चलते आम लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। खासकर बच्चों को घर से अकेले भेजने में लोगों को डर लगता है। बच्चों पर कुत्ते पहले भी कई बार हमले कर चुके हैं।  

सभा के सदस्यों ने कहा कि इससे पहले भी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं घट चुकी हैं। शहर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे ऐसी घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं। इसके साथ ही शहर में बंदरों का आतंक भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। उन्होंने जिला प्रशासन और नगर परिषद को चेतावनी देते हुए कहा कि लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करना बंद करें। नहीं तो सभा द्वारा आंदोलन चलाया जाएगा।
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सभा के सह संयोजक अमन ने कहा कि इससे पहले भी डीवाईएफआई जिला प्रशासन से इस मुद्दे पर कार्रवाई करने की मांग कर चुका है। इस पर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा 50 रुपये प्रति कुत्ते जैसी स्कीमें निकाली गईं लेकिन इसका कोई फायदा आम जनता को नहीं मिला। ऐसे योजनाओं की व्यवहारिकता को जांचे बिना ही चलाया जा रहा है। इससे साफ पता चलता है कि प्रशासन इस मुद्दे पर बिलकुल गंभीरता से नहीं ले रहा है।

कुत्तों की नसबंदी करवाएगी नप
नगर परिषद के ईओ पीआर नेगी ने कहा कि कुत्तों की इस समस्या का नसबंदी के अलावा दूसरा कोई इलाज नहीं है। कुत्तों को मार नहीं सकते। ऐसे में एक बार फिर से कुत्तों की नसबंदी की जाएगी ताकि उनकी बढ़ती संख्या पर पाबंदी लगाई जा सके।
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