सोलन में पिछले काफी समय से बारिश न होने से मुरझाई मटर की फसल। संवाद
इस बार लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान, बारिश की कमी से रुकी पौधों की ग्रोथ
सब्जी मंडी में 20-25 प्रति किलो मिल रहे दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला सोलन के मटर उत्पादकों पर इस बार कुदरत की बेरुखी भारी पड़ी है। समय पर बारिश न होने से जिला में मटर की फसल पहले ही तुड़ान में सिमट कर रह गई है। सूखे की मार के कारण न तो पौधों का सही विकास हो पाया और न ही फलियां पूरी तरह से भर सकीं। सबसे बुरा हाल जिले के बारिश पर निर्भर क्षेत्रों का है, जहां किसानों को बीज और महंगी दवाओं की लागत वसूलना भी मुश्किल हो गया है। जानकारी के अनुसार इस सीजन में बारिश की भारी कमी के कारण अधिकतर किसान बिजाई ही नहीं कर पाए थे। जिन किसानों ने सूखे के बावजूद रिस्क लेकर बिजाई की थी, उनकी फसल अब खेतों में ही दम तोड़ रही है। पिछले महीने की शुरुआत में नाममात्र की बारिश हुई जरूर, लेकिन वह फसल को संजीवनी देने के लिए नाकाफी साबित हुई। आलम यह है कि जो किसान मटर से अच्छी कमाई की उम्मीद लगाए बैठे थे, वे अब अपनी मूल लागत के लिए भी तरस रहे हैं। एक तरफ पैदावार कम हुई है, तो दूसरी तरफ बाजार में मिल रहे कम दाम किसानों के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं। सोलन मंडी में इन दिनों मटर मात्र 20 से 25 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। हालांकि, जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां से मटर की खेप मंडी पहुंच रही है, लेकिन कुल उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
कोट
बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में मटर की फसल पहले ही खराब हो चुकी थी। जिन इलाकों में देरी से बिजाई हुई थी, वहां भी फसल एक ही तुड़ान में खत्म हो रही है। बारिश न होने से ग्रोथ पूरी तरह बाधित हुई है।
- डॉ. देवराज कश्यप, उपनिदेशक, कृषि विभाग, सोलन