दमकम विभाग की गाड़ियों के लिए अलग से पानी की लाइन नहीं होने से 400 उद्योगों पर मंडराता है खतरा
एमएम भंडारी
परवाणू (सोलन)। हिमाचल प्रदेश के प्रवेशद्वार परवाणू में आग की घटनाओं से निपटने के लिए साधन बेहद कमजोर हैं। हालत यह है कि आग लगने की बड़ी घटना होने पर दमकल विभाग को पानी के लिए घंटों जूझना पड़ता है। इससे शहर के 400 छोटे-बड़े उद्योगों पर हर समय संकट मंडराता रहता है। शहर में कागजों पर तो फायर हाइड्रेंट लगाए गए हैं, लेकिन इनके लिए पानी की अलग से कोई पाइप लाइन नहीं है। शहर की जिस पानी की लाइन से लोगों के घरों में सप्लाई होती है, उसी से फायर हाइड्रेंट को जोड़ा गया है। यानी, पहले पानी लोगों के घरों तक पहुंचता है, उसके बाद ही फायर हाइड्रेंट में पानी आता है। इस व्यवस्था के कारण दमकल विभाग को अपनी गाड़ियों में पानी भरने में भारी दिक्कत आती है और बहुमूल्य समय बर्बाद होता है।
36 हाइड्रेंट में से 10 जमीन में दबे
वर्तमान में औद्योगिक शहर में 36 फायर हाइड्रेंट हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से 8 से 10 हाइड्रेंट जमीन के नीचे दबे हुए हैं, जो किसी काम के नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि पानी सप्लाई का नियंत्रण अब जलशक्ति विभाग के पास है। किसी भी आपात स्थिति में अग्निशमन विभाग को गाड़ी में पानी भरने के लिए पहले जलशक्ति विभाग के कर्मचारी को बुलाना पड़ता है और पानी छोड़ने के लिए कहना पड़ता है। इस प्रक्रिया में समय अधिक लगता है और दमकल कर्मियों को बेवजह की परेशानी उठानी पड़ती है।
4.30 करोड़ की योजना का सिर्फ ड्राफ्ट
हालांकि, जलशक्ति विभाग ने अग्निशमन विभाग के साथ मिलकर आग से निपटने की पुख्ता तैयारी के लिए 4.30 करोड़ रुपये की एक बड़ी योजना का प्रारूप तैयार किया है। इस ड्राफ्ट में अलग से पाइपलाइन बिछाने और पानी के टैंक निर्माण का प्रावधान है ताकि आग लगने पर विभाग को तुरंत पानी मिल सके। मगर, यह योजना कब धरातल पर उतरेगी और परवाणू के उद्योगों को कब राहत मिलेगी, इसका कोई अता-पता नहीं है।
परवाणू अग्निशमन विभाग के फायर ऑफिसर अनिल कुमार ने बताया की शहर में 25 हाइड्रेंट सुचारु हैं। इनमें पानी जलशक्ति विभाग की ओर से छोड़ा जाता है। खराब हाइड्रेंट को ठीक करवाने का कार्य किया जाना है।
-अनिल कुमार,फायर ऑफिसर, परवाणू
कोट
परवाणू शहर के लिए 4.30 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इससे परवाणू शहर में लगे हाइड्रेंट के लिए अलग से पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसी के साथ टैंक का निर्माण कार्य भी होगा। इससे आगजनी की घटनाओं को निपटने के लिए आसानी हो जाएगी।
-भानू उदय,सहायक अभियंता, जलशक्ति विभाग, धर्मपुर