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‘घोड़े के नाल की अंगूठी’ नाटक से की अंधविश्वास पर चोट

Thu, 09 Jun 2016 08:20 PM IST
अमर उजाला साोलन
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फिलफाट फोरम सोलन के सात दिवसीय नृत्य एवं नाटक प्रतियोगिता समारोह में उमंग कल्चरल एंड वेलफेेयर सोसायटी सोलन की ओर से एक हास्य नाटक काले घोड़े की नाल की अंगूठी का मंचन किया गया। निर्देशन उमंग के प्रधान दिनेश वशिष्ट ने किया। केएम मिश्रा की ओर से लिखित इस नाटक का मंचन स्थानीय बोली में किया गया। कार्यक्रम में मौजूद सभी प्रतिभागियों और अन्य दर्शकों ने नाटक का खूब आनंद लिया ।
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हिमाचली वस्त्र एवं बोली के माध्यम से इस नाटक के जरिये अंधविश्वास में पड़कर इंसान की मनोदशा को दर्शाया गया है कि किस तरह नाटक का एक पात्र जीत लाल एक ढोंगी बाबा के बहकावे में आकर उससे काले घोड़े की नाल की अंगूठियां खरीद लेता है। यह सोचता है कि उसे पहनने के बाद उसकी सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी, लेकिन जब वह अंगूठी पहनता है तो उसे कोई फायदा नहीं होता। घर और ऑफिस में उसे उल्टा असर देखने को मिलता है। जीतलाल एक अंगूठी अपने छोटे भाई नंदलाल को भी देता है। नंदलाल भी अंगूठी पर भरोसा कर अपनी क्लास में पढने वाली कलावती को प्रेम प्रस्ताव देता है। कलावती उल्टा उसे जेल की हवा खिलवा देती है। नाटक के अंत में जब जीत लाल अपने छोटे भाई नंदलाल को जेल से छुड़वाकर घर पहुंचता है, तब उन्हें अहसास होता है कि इस तरह के अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए। इंसान को कभी भी समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कुछ नहीं मिलता और सफलता प्राप्त करने के लिए सभी को मेहनत करनी चाहिए न कि इस तरह के अंधविश्वास में पड़ना चाहिए।
नाटक में भाग लेने वाले कलाकार मनुज शर्मा, नरेंद्र कुमार वर्मा, विक्रम शर्मा, लीना शर्मा, पून चौधरी, रचिता सूद, अखिल ठाकुर, शुभम अग्रवाल, दिनेश वशिष्ट, बैक स्टेज सहयोगी रहे राम प्रकाश, विजय, नरेंद्र शर्मा विशेष रूप से शामिल रहे। लोगों ने इस नाटक को बहुत पंसद किया।
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