कार्यों की निगरानी होगी प्रभावी, महिलाओं की भागीदारी होगी सुनिश्चित
कुनिहार की सभी पंचायतों में सचिव बनाएंगे सभी तरह के प्रमाण-पत्र
बीडीओ कुनिहार ने महिलाओं और पंचायत सचिवों को सौंपा इसका जिम्मा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। विकास खंड कुनिहार की सभी 56 पंचायतों में अब महिलाएं जीरामजी (मनरेगा) के तहत किए जाने वाले कार्याें की हाजिरी लगाएंगी। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बीडीओ ने इसका जिम्मा सौंपा है। पहले मनरेगा मजदूरों की हाजिरी पंचायत सदस्य दर्ज करते थे लेकिन अब महिलाएं हाजिरी लगाएंगी।
खंड विकास अधिकारी कुनिहार तन्मय कंवर का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य कार्यों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ कार्यों को अंजाम देंगी। इससे मनरेगा योजनाओं में समयबद्धता आएंगी और मजदूरों को भी लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका मजबूत होंगी और सामाजिक सशक्तीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा अब पंचायतों से जारी होने वाले सभी प्रकार के प्रमाण-पत्र पंचायत सचिव की ओर से ही जारी किए जाएंगे। नई व्यवस्था लागू होने से लोगों को एक ही स्थान पर प्रमाणपत्र उपलब्ध हो सकेंगे। प्रक्रिया अधिक सरल व व्यवस्थित बनेगी। पहले प्रधान इसे जारी करता था। सरकार की प्राथमिकता है कि ग्रामीण स्तर पर अधिकतम सेवाएं पंचायतों के माध्यम से ही उपलब्ध करवाई जाएं। इससे लोगों को दूरस्थ कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस निर्णय से न केवल आमजन को राहत मिलेगी बल्कि पंचायत सचिवों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होगी और जवाबदेही तय होने से कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था जन्म, निवास, आय, परिवार पहचान सहित अन्य सामान्य प्रमाण-पत्रों पर लागू होंगी। इससे पंचायतों में कार्य प्रणाली अधिक सुदृढ़ होगी। ग्रामीणों को समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी। प्रशासन का मानना है कि इससे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी आसानी होगी और दस्तावेजी प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब समाप्त होगा।
सफाई व्यवस्था यथावत
खंड विकास अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पंचायतों में सफाई व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। सफाई का कार्य पहले की तरह नियमित रूप से जारी रहेगा। पंचायत कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वच्छता व्यवस्था में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए, ताकि गांवों में साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी मानकों को बनाए रखा जा सके।