शहर में आईपीएच और नगर परिषद के पानी की गुणवत्ता हाशिये पर है। हर वर्ष पीलिया समेत जलजनित रोगों के मामले बढ़ने लगे हैं। तो वहीं चिंताजनक यह भी है कि शौचमुक्त का दावा करने वाले प्रदेश के एडवांस शहर सोलन को सीवरेज की दरकार है।
सरकारी तंत्र की नाकामी के चलते जिन वार्डों में सीवरेज लाइन बिछ चुकी है, वहां कनेक्शन लेने के लिए कतराने वालों की कमी नहीं। वहीं जहां सीवरेज सुविधा नहीं है, वहा सेप्टिक टैंक न बनाकर घर या कॉलोनी की गंदगी सीधे नालों में फेंकी जा रही है। नालों में गंदी पानी घुलकर पानी को दूषित कर रही है। जिससे न केवल आईपीएच बल्कि प्रदूषण बोर्ड, नप और प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नतीजतन मेट्रोपलिटन की तर्ज पर विकसित हो रहे शहर की हालत देहात से भी बद्दतर है। जहां की पंचायतें निर्मल पुरस्कार पाकर बाहरी शौचमुक्त हो चुकी हैं।