कुनिहार में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान मौजूद भक्तगण। स्रोत : आयोजक
हर-हर गंगे कांवड़ सेवा संघ हाटकोट करवा रहा शिवमहापुराण कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। हर-हर गंगे कांवड़ सेवा संघ हाटकोट कुनिहार के तत्वावधान में शिव महापुराण कथा में कथा व्यास शशांक कौशल ने देवी महिमा, माता पार्वती के अवतरण और भगवान शिव-पार्वती विवाह से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया।
कथा व्यास ने बताया कि पितरों की तीन कन्याएं श्रापवश पृथ्वी पर अवतरित हुईं और पार्वती, सीता और श्रीराधा की माताओं के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग सनातन परंपरा में मातृत्व, तप और भक्ति की महिमा का प्रतीक है। देवी द्वारा हिमालय को दिए गए देवी गीता के उपदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने आत्मज्ञान, धर्म, भक्ति और मोक्ष के मार्ग का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए राजसी सुखों का त्याग कर हिमालय में वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी अटूट निष्ठा की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ब्रह्मचारी का वेश धारण कर उनके पास पहुंचे। उन्होंने अपने विरक्त स्वरूप का वर्णन करते हुए माता पार्वती को किसी अन्य देवता को पति के रूप में स्वीकार करने की सलाह दी। इस पर माता पार्वती ने दृढ़ता से कहा कि भगवान शिव ही उनके आराध्य और परमेश्वर हैं तथा उनके अतिरिक्त किसी अन्य को पति रूप में स्वीकार नहीं करेंगी। उनकी अटूट श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें विवाह का वरदान दिया।
कथा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। अंत में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्म, भक्ति, तप और समर्पण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।