रामशहर के बडडू प्राचीन महाकाली मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मौजूद भक्त। स्रो
संवाद न्यूज एजेंसी
रामशहर(सोलन)। रामशहर के बड्डू में प्राचीन महाकाली मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक आचार्य सुनील शर्मा ने शिव विवाह की कथा का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि माता सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव गहरी समाधि में चले गए थे। दूसरी ओर माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। पार्वती की परीक्षा लेने के लिए शिव ने एक ब्राह्मण का भेष धारण किया और पार्वती को शिव के चरित्र (अघोरी, राख लगाने वाले) के बारे में डराया, लेकिन पार्वती अपने प्रण पर अटल रहीं। इसके बाद शिव विवाह के लिए तैयार हो गए। उन्होंने बताया कि भगवान शिव के विवाह में भगवान विष्णु, ब्रह्मा जी सहित देवता और ऋषि-मुनि शामिल हुए, लेकिन शिवजी के साथ भूत, पिशाच, अघोरी और डाकिनी-शाकिनी की अजीब बारात थी। माता पार्वती की मां मैना शिव का डरावना रूप देखकर मूर्छित हो गईं। बाद में माता पार्वती के आग्रह पर शिवजी ने अत्यंत सुंदर रूप धारण किया और हिमाचल के घर में विवाह संपन्न हुआ।