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Solan News: प्राकृतिक खेती से लागत घटाने और पैदावार बढ़ाने के बताए तरीके

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कृषि विज्ञान केंद्र सोलन ने 5 विकास खंडों में आयोजित किए प्रशिक्षण कार्यक्रम
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विशेषज्ञों ने जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीट प्रबंधन की दी जानकारी
डॉ. सीमा ठाकुर ने किसानों से प्राकृतिक खेती को जन-अभियान बनाने का किया आह्वान
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। कृषि विज्ञान केंद्र सोलन द्वारा जिले के पांचों विकास खंडों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की गई है। पांच अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कुल 750 किसानों को प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक व व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य किसानों को टिकाऊ और कम लागत वाली कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को देसी गाय आधारित कृषि पद्धतियों, जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत बनाने और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की विस्तार से जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने खेत स्तर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर किसानों को कृषि लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने के गुर सिखाए। प्रशिक्षण सत्र में डॉ. राजेश ठाकुर ने फूलों की खेती में प्राकृतिक तकनीकों के प्रयोग की जानकारी दी। डॉ. किरण ठाकुर ने प्राकृतिक विधि से फलदार फसलों के उत्पादन व प्रबंधन के तरीके बताए। वहीं, डॉ. दीपिका शर्मा ने सब्जियों, फलों और फूलों में लगने वाले कीटों की पहचान और उनके प्राकृतिक नियंत्रण के उपाय साझा किए।
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कृषि विज्ञान केंद्र सोलन की प्रभारी डॉ. सीमा ठाकुर ने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती को महज एक कृषि पद्धति न मानकर इसे जन-अभियान के रूप में आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि किसान इस ज्ञान को अन्य किसानों तक भी पहुंचाएं, ताकि पूरे जिले के किसान इसका लाभ उठा सकें।
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