नालागढ़ में श्री राम कथा सुनते लोग। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ के वार्ड-3 के चोए वाले बाबा भारती शिव मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिन व्यासपीठ आचार्य पंडित राधे मोहन कण्व ने कई प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनागमन के कुछ समय बाद जब अयोध्या लौटे भरत को यह समाचार मिला कि उनके पिता महाराज दशरथ शोकवश स्वर्ग सिधार गए हैं और माता कैकेयी के कारण राम को वनवास मिला, तो वे अत्यंत दुखी और क्षुब्ध हुए। उन्होंने राम का राज्य लौटाकर उन्हें अयोध्या लाने का दृढ़ निश्चय किया। भरत की यात्रा जब चित्रकूट पहुंची, तो वहां का वातावरण भक्ति और करुणा से भर गया। राम और भरत का मिलन अश्रुपूरित था। भरत ने श्रीराम के चरण पकड़ लिए और उन्हें अयोध्या लौट चलने का आग्रह किया। किंतु श्रीराम ने पिता की आज्ञा और धर्म का पालन करते हुए वनवास की अवधि पूर्ण करने की अपनी प्रतिज्ञा दोहराई।