तीसरे साल फिर से मक्की की फसल को पहुंचाया नुकसान
विभाग की लिखी दवा भी नहीं कर रही सूंडी पर असर
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। बीबीएन क्षेत्र में इस वर्ष भी दोबारा मक्की की फसल पर फाल आर्मी वर्म ने हमला बोल दिया है। यह रोग इतनी तेजी से फैल रहा है कि कई खेत इसकी चपेट में आ गए हैं। वहीं अब किसानों को मक्की की फसल की चिंता सताने लगी है।
बीबीएन में 6500 हेक्टेयर जमीन पर किसान मक्की की फसल उगाते हैं। पिछले तीन सालों से सूंडी मक्की की फसल पर हमला कर इसे नष्ट कर रही है। इस वर्ष भी जुलाई माह में किसानों को फसल में इसके लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं। यह फाल आर्मी वर्म पत्तों से रस चूस लेता है और मक्की का पौधा सूख जाता है। बीबीएन की ढांग निहली, मझौली, बीड प्लासी, सैणी माजरा, बरुणा, जगतपुर, बगलैहड़, जोघों, पंजेहरा, दभोटा, मानपुरा, किशनपुरा, किरपालपुर आदि पंचायतों में इसका असर अधिक दिख रहा है।
नंदपुर पंचायत के किसान अमर चंद ठाकुर, मुकेश कुमार, सौढ़ी राम, नालागढ़ प्रेम चौधरी, खेड़ा के अवतार सैणी ने बताया कि मक्की अब किसानों को घाटे के सौदा हो रही है। फाल आर्मी वर्म के लिए विभाग जो दवाई लिखता है वह काफी महंगी है। 1600 रुपये की यह दवा आती है। लेकिन दवाई के छिड़काव करने से यह कीड़ा मरता नहीं है। इससे दुर्गंध भी आती है और किसानों को एलर्जी होने का भी डर बना रहता है।
उधर, कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ ड़ॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि कोराजिन दवाई का एक पंप में 6 एमएल की दवाई डाल कर इसका छिड़काव करें। यह छिडक़ाव सुबह व शाम करें। धूप में इसका स्प्रे न करें। किसान अगर रोग ग्रस्त पौधे को उखाड़ कर मिट्टी के नीचे दबा देता है तो यह बीमार खत्म हो जाती है। एक मादा वर्म एक हजार से पंद्रह सौ के बीच में एक पत्ते पर अंडे देती है। जो दो तीन दिन में कीट बन जाते है। अधिक मात्र में इनकी पैदावार होने से यह किसानों की फसल को नष्ट कर देते हैं।