मित्तियां माता मंदिर में श्रीदेवी भागवत कथा का श्रवण करते हुए भक्तगण। संवाद
मितियां में कथा के पांचवें दिन सुनाया महिषासुर वध का प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। मितियां स्थित माता दुर्गा मंदिर में श्रीमद् देवी भागवत कथा के पांचवें दिन स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि सत्व, राज व तम इन तीन गुणों के मेल से संसार का प्रादुर्भाव हुआ है, यही सृष्टि का सनातन नियम है। सृष्टि के समय माया से मोहित मनुष्य की इंद्रियां अत्यंत चंचल हो जाती हैं। उनमें आसक्त तीन गुणों से प्रेरित होकर विविध भाव प्रकट करने लगता है। ब्रह्मा से लेकर तिनका पर्यंत स्थावर जंगम सभी प्राणी माया के वशीभूत रहते हैं। जब माया नृत्य करती है। जीव भी उसके पीछे नृत्य करने लगता है। अपना कार्य सिद्ध करने के लिए मनुष्य असत्य का सहारा लेता है। काम क्रोध लोभ मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं। मनुष्य इनके बस में होने के कारण कर्तव्य और अकर्तव्य को नहीं जान पाता। माया से छूटने का एक ही उपाय है हम भगवती और भगवान के चरणों का आश्रय लें। नीति से अर्जित किया हुआ धन धर्म कार्य में लगाएं।
महिषासुर का प्रसंग सुनाते हुए स्वामी ने कहा महिषासुर ने तप करने के बाद ब्रह्मा से वरदान मांगा कि मेरी मृत्यु न हो। तो ब्रह्मा जी ने कहा कि मृत्यु अटल सत्य है, इसके अतिरिक्त अन्य कोई भी वर मांग लो तो महिषासुर ने कहा कि मेरी मृत्यु हो तो स्त्री के हाथों हो। उसने सोचा कि जो अपनी रक्षा नहीं कर सकती वह स्त्री मुझे क्या मारेगी। महिषासुर की शर्त के अनुसार फिर देवताओं के तेज से महिषासुर मर्दिनी प्रकट हुईं और महिषासुर का वध हुआ। नारी को कभी भी कमजोर नहीं समझना चाहिए। मंदिर में महिषासुर मर्दिनी की मोहक झांकी भी सजाई गई। लोगों ने दर्शन किया। कथा के श्रवण के लिए हजारों की संख्या में भक्त आए और कथा का आनंद उठाया और लंगर का प्रसाद ग्रहण किया।