संवाद न्यूज एजेंसी।
बद्दी (सोलन)। बद्दी के पलांखवाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को हवन व पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन कथावाचक आचार्य 1008 साध्वी ऋषि गिरि महाराज ने राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित, अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु-उत्तरा के पुत्र थे, जिनकी रक्षा स्वयं भगवान कृष्ण ने गर्भावस्था में की थी। कलयुग के प्रभाव में आकर उन्होंने तपस्वी शमीक ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया था, जिसके परिणामस्वरूप ऋषि पुत्र श्रृंगी ने उन्हें सात दिन बाद तक्षक नाग के डसने का श्राप दिया। श्राप को सत्य मानकर राजा परीक्षित ने राज-पाट त्याग दिया और गंगा तट पर सात दिन तक शुकदेव से श्रीमद्भागवत का श्रवण किया, जिसके उपरांत उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। कथा के बाद साध्वी ऋषि गिरी महाराज ने कहा कि सतयुग में तप, त्रेता में ज्ञान और द्वापर में यज्ञ श्रेष्ठ साधन थे, जबकि कलियुग में दान एवं नाम-जप को सर्वोत्तम माना गया है। साध्वी ने कहा कि कलियुग केवल नाम-अधारा, सुमिरन मात्र से ही मोक्ष संभव है। पूर्णाहुति के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप, कृषि देवी, सुशीला, उर्मिला, सुदर्शन, प्रोमिला, एडवोकेट कार्तिक कौशल, सोनिया, राजपूत सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।