प्रदेश के स्कूलों में राइजिंग क्लस्टर के तहत की जा रही व्यवस्था
स्कूलों के खेल मैदान, आईटी लैब, शिक्षक की भी होगी शेयरिंग
शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों को क्लस्टर बनाने के दिए हैं निर्देश
ललित कश्यप
सोलन। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब प्री प्राइमरी से वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों तक एक ही क्लस्टर व्यवस्था लागू होगी। इसे राइजिंग क्लस्टर योजना का नाम दिया है। शिक्षा निदेशालय की ओर से भी इस योजना को प्रदेश के सभी स्कूलों में लागू करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके बाद सभी जिलों में इस पर कार्य भी शुरू कर दिया है। योजना के तहत यदि शिक्षक लंबी छुट्टी के लिए जाता है तो उसे क्लस्टर कमेटी के अध्यक्ष व सदस्य सचिव को सूचना देनी होगी ताकि विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए किसी और शिक्षक की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। इस व्यवस्था को शुरू करने के लिए स्कूल क्लस्टर समिति बनेगी जिसमें वरिष्ठ माध्यमिक उच्च माध्यमिक पाठशाला के प्रिंसिपल या हेड मास्टर अध्यक्ष होंगे। यदि कोई शिक्षक की व्यवस्था नहीं होती है तो इसमें प्रिंसिपल या फिर शिक्षा खंड अधिकारी विद्यार्थियों की कक्षाएं लेंगे।
जानकारी के अनुसार स्कूलों में आपसी समन्वय को बढ़ाने के लिए इस योजना को शुरू किया है। स्कूल क्लस्टर सिस्टम पर सभी जिलों में कार्य भी शुरू कर दिया है। 300 से 500 मीटर के दायरे में स्कूलों में यह सिस्टम लागू होगा। जिसमें प्री प्राइमरी से लेकर जमा दो तक के स्कूलों को शामिल किया है, जिसमें क्लस्टर स्कूल का अध्यक्ष अपने सभी स्कूलों की नियमित निगरानी करेगा। वहीं सभी बच्चों को शेयरिंग से खेल मैदान, आईटी लैब, शिक्षक की भी व्यवस्था प्रदान करवाएगा। इसके अलावा प्री प्राइमरी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों का एक ही छत के नीचे मीड-डे मिल बने इसके लिए भी कार्य किया जा रहा है। इसमें सभी बच्चे एक साथ बैठकर खाना भी खा सकेंगे।
उधर, शिक्षा उपनिदेशक उच्च शिक्षा डॉ. जगदीश नेगी ने बताया कि जिले में राइजिंग क्लस्टर के तहत कार्य किया जा रहा है। इसमें सभी शिक्षा खंडों में इसका गठन भी कर लिया है। योजना के तहत बच्चों को सभी व्यवस्था शेयरिंग से प्रदान की जाएंगी। जिसका ध्यान क्लस्टर प्रभारी रखेगा।