दो बार अलग-अलग मुख्यमंत्रियों ने की घोषणा, आज तक अधूरी
50 से ज्यादा रूट चल रहे अर्की से, सब डिपो न होने से हो रही दिक्कत
बसों की कमी होने से अकसर कई रूट रहते हैं बंद, लोग होते हैं परेशान
योगेश शर्मा
अर्की (सोलन)। हिमाचल पथ परिवहन निगम का अर्की में सब डिपो 13 वर्षों से मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों की घोषणाओं में उलझकर रह गया है। अर्की के लोगों को सब डिपो के नाम पर केवल पथ परिवहन का शिलान्यास और उद्घाटन बोर्ड ही नसीब हुआ है। आज तक सब डिपो को लेकर काम शुरू नहीं हो पाया।
इस समय अर्की क्षेत्र में हिमाचल पथ परिवहन निगम के करीब 50 से ज्यादा रूट पर चलते हैं। इन रूटों को चलाने वाले मात्र डेढ़ दर्जन बसें ही हजारों किलोमीटर का सफर तय कर रही हैं। इस दौरान यदि कोई बस किसी रूट पर हांप जाए तो यात्री राम भरोसे ही रहते हैं या प्राइवेट वाहन का सहारा लेकर इन्हें अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचाना पड़ता है। कई-कई दिनों तक रूट फिर बहाल नहीं हो पाता।
गौरतलब है कि 13 वर्ष पहले घोषित सब डिपो की खास बात यह है कि इसे लेकर भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों ने अलग-अलग मंचों से घोषणा की थी। सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 2012 में सब डिपो का उद्घाटन किया। कुछ दिनों बाद केवल टायर पंक्चर की मशीन सब डिपो के नाम पर लगा दी। इसे कांग्रेस सरकार बनने के कुछ ही महीनों बाद ही उठा दिया गया। इसी बीच सरकार बदल गई और कांग्रेस के कार्यकाल में सब डिपो के नाम पर कोई हलचल नहीं हुई। उसके बाद भाजपा की सरकार बनने के एक वर्ष बाद कुनिहार में 25 जनवरी 2019 को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने फिर से सब डिपो की घोषणा की।
इससे क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी कि सब डिपो बनने से यहां से रात्रि सेवा और लॉन्ग रूट की बसें चलना शुरू होंगी और लोगों को काफी सुविधा मिलेगी लेकिन साल 2019 से लेकर आज दिन तक सब डिपो केवल शिलान्यास पट्टी ही बनकर रह गई।
क्षेत्रीय प्रबंधन अधिकारी सोलन सुरेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि सब डिपो के लिए वर्कशॉप की जमीन की फेंसिंग की तैयारी की जा रही है। अर्की के पास खरयावांण में वर्कशॉप बनाई जाएगी, इसके लिए 19 लाख का बजट सरकार से मिल गया है।