स्कूलों में मिड-डे मील में अब बच्चों को प्रोटीन से भरपूर मशरूम भी मिलेगी। इसमें खास बात यह है कि यह मशरूम स्कूल में ही उगाई जाएगी। यह अनूठी पहल प्रारंभिक चरण में जिला सोलन से शुरू की गई है। खुंब अनुसंधान केंद्र एवं निदेशालय के विशेषज्ञ अध्यापकों को मशरूम तैयार करने का प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद इसे स्कूलों में भी तैयार किया जाएगा।
एमडीएम जिला नोडल अधिकारी राजकुमार पराशर ने बताया कि बच्चों को स्कूल में तैयार ताजा मशरूम परोसा जाएगा। इसके लिए स्कूलों में न्यूट्रीशन गार्डन के तहत मशरूम तैयार होगी। इसे मिशन व्हाइट अंब्रेला का नाम दिया गया है। इसके लिए 24 फरवरी को जिले के चयनित 24 स्कूलों के टीजीटी और प्रवक्ताओं को डीएमआर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां से प्रशिक्षण लेने के बाद यह अपने-अपने क्लस्टर स्कूलों के अध्यापकों और बच्चों को प्रशिक्षण देंगे। इसमें बच्चों को जहां मशरूम की जानकारी मिलेगी वहीं स्कूल में ही ताजा मशरूम मिड-डे मिल में सेवन करेंगे।
प्रारंभिक चरण में 24 क्लस्टर स्कूल चयनित
स्कूल न्यूट्रीशियन गार्डन के तहत स्कूलों में शिक्षा विभाग की ओर से मिशन व्हाइट अंब्रेला योजना को शुरू किया जा रहा है। इस मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रोटीन से भरपूर दोपहर का भोजन देना है। इसमें प्रारंभिक चरण में जिले के 24 क्लस्टर स्कूलों को चुना गया है। यहां से विज्ञान टीजीटी और प्रवक्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद यह स्कूल के अन्य क्लस्टर अध्यापकों को प्रशिक्षण देकर स्कूलों में मिलकर मशरूम तैयार करेंगे। इसमें बच्चे स्कूल में तैयार ताजा मशरूम का सेवन मिड-डे-मील में करेंगे।
ये हैं मशरूम के फायदे
मशरूम सुपरफूड है। ये कैलोरी में कम और पोषण में भरपूर होता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाता है। हड्डियों को मजबूत करता है (विटामिन डी का अच्छा स्रोत), वजन प्रबंधन, हृदय स्वास्थ्य (ब्लड प्रेशर) और पाचन तंत्र को सुधारने में मदद करता है। यह सूजन रोधी गुणों से भरपूर है और मधुमेह के रोगियों के लिए भी एक अच्छा विकल्प है।
शिक्षकों को ढिंगरी मशरूम की देंगे ट्रेनिंग
खुंब अनुसंधान के कार्यकारी निदेशक डॉ. ब्रिज लाल अत्रि ने बताया कि शिक्षकों को ढिंगरी मशरूम का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें विज्ञान विषय से संबंधित अध्यापक और प्रवक्ता होंगे। इसके अलावा स्कूलों में मशरूम तैयार करने के लिए डीएमआर की ओर से भी उनका मार्गदर्शन किया जाएगा।