बद्दी (सोलन)। किसानों की आर्थिकी को सुधारने को लेकर भले ही मोदी सरकार ने तीन-तीन नए अधिनियम लाए हों लेकिन धरातल पर किसानों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। आलम यह है कि बद्दी के किसानों का अनाज पंजाब की मंडियों के अंदर ही नहीं जाने दिया जा रहा है। दुखद पहलू यह है कि हिमाचल में कहीं भी ऐसी अनाज मंडी नहीं है जहां किसान अपना अनाज बेच सकें। किसान मंजीत सिंह, धर्मपाल कौशिक, पदमनाथ, राम सिंह, रामपाल, दयाल चंद, श्याम, सुरजीत सैणी, सुखदेव सिंह, नरेंद्र सैणी, चंन्न सैणी, बलवीर, रविंद्र सिंह सैणी, सज्जन सिंह, यादविंद्र सिंह, हाकम सिंह, ज्ञान सिंह, कृपाल का कहना है कि वह धान लेकर पंजाब की घनौली मंडी पहुंचे तो उन्हें मंडी के अंदर नहीं जाने दिया गया।
साथ ही यह भी कह दिया कि वह हिमाचल के किसानों का अनाज नहीं खरीदेंगे। इसके बाद उन्होंने भट्टा साहिब की मंडी का रुख किया लेकिन वहां भी उनके साथ ऐसा ही बर्ताव किया गया। उन्होंने पंजाब की अन्य मंडियों के साथ भी संपर्क साधा लेकिन सभी ने हिमाचल के किसानों से अनाज लेने से मना कर दिया। भारतीय किसान संगठन के प्रदेशाध्यक्ष गोपाल चंद नेगी, सचिव जितेंद्र शर्मा, नालागढ़ मंडलाध्यक्ष जसविंद्र सैणी, बरोटीबाला इकाई के अध्यक्ष अनिल शर्मा, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रामलोक ठाकुर व निक्का राम ने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार किसानों को कहीं भी अनाज बेचने की छूट देने की बात ऊंचे मंचों से कर रही है लेकिन हालात ये हैं कि उनका अनाज साथ लगते राज्य पंजाब में भी नहीं बिक रहा है।
किसानों ने रोष जताया कि हिमाचल में आज तक कोई अनाज मंडी नहीं बन पाई है जहां वे अपना अनाज बेच सकें। आखिर हिमाचल के किसानों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। किसानों ने रोष जताया कि यदि उनके साथ ऐसा ही दुखद बर्ताव किया जाता रहा तो वह अनाज की बिजाई करना बंद कर देंगे। इससे पहले भी वह अपना अनाज मंडियों में ही बेचते रहे हैं।