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85 लाख के लोन का गारंटर बोला:लोन के लिए नहीं किए कोई हस्ताक्षर, नोटिस मिलने पर चला पता

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पूर्व मंत्री का भाई भी निकला डिफाल्टर, गारंटर की संपत्ति अटैच
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चार डिफाल्टरों की संपत्तियां होंगी नीलाम, दो की अटैच
दूसरे दिन अदालत में हुई एक दर्जन मामलों पर सुनवाई

सबसे अधिक 40 लाख रुपये लोन का डिफाल्टर भी पहुंचा
सहायक पंजीयक की अदालत में चल रही है कार्रवाई

संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। बघाट बैंक लोन रिकवरी मामले में सहायक पंजीयक की अदालत में दूसरे दिन 33 डिफाल्टरों को बुलाया गया, जिसमें एक दर्जन के करीब मामलों पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान 85 लाख रुपये के ऋण और ब्याज रकम के एक गारंटर ने कहा कि उसे न तो लोन का पता था और न ही उसने इसके लिए कोई हस्ताक्षर किए। गारंटर का कहना था कि वह कई बार बैंक में भी गया लेकिन उसे किसी ने नहीं बताया कि वह किसी डिफाल्टर लोन में गारंटर है। उसे पता तब चला जब इसका नोटिस आया। हालांकि सहायक पंजीयक ने इसमें मामला दर्ज करवाने के लिए कहा।
वहीं दूसरे मामले में प्रदेश के पूर्व मंत्री के भाई के लोन का मामला भी पहुंचा। मंत्री के भाई ने वर्ष 2013 में 28 लाख रुपये लोन लिया था, जो अब 52 लाख पहुंच गया है। इसमें अब गारंटर की संपत्ति को अटैच करने के आदेश दिए गए। अदालत में पहुंचे ज्यादात्तर डिफाल्टरों ने एकमुश्त भुगतान करने के लिए सहायक पंजीयक के समक्ष हामी भरी और इसके लिए आवेदन भी किया। जिसे अब बैंक को भेजा जाएगा। वहीं दूसरी ओर अदालत ने चार डिफाल्टरों की संपत्तियों को बेचने के आदेश जारी कर दिए, जबकि दो की संपत्तियां अटैच करने के लिए भी कहा। अटैच की गई संपत्तियों का मामला अब शिमला रजिस्ट्रार के पास भेजा जाएगा। अदालत में दूसरे दिन भी सबसे अधिक 40 लाख रुपये के लोन का डिफाल्टर पहुंचा था।
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सूत्रों की मानें तो अदालत में पहुंचे गारंटरों ने जवाब दिए कि उन्हें पता नहीं था कि उनसे किसलिए हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं। वहीं कुछ ने यह भी बताया कि जब उनसे साइन करवाए गए तो यह नहीं बताया गया कि लोन कितना है और संपत्ति कौन सी अटैच की गई है। हालांकि सहायक पंजीयक ने जब उनसे कहा कि उन्होंने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज क्यों नहीं करवाई तो उन्होंने इसमें कोई भी जवाब नहीं दिया। जिस पर सहायक पंजीयक ने उन्हें सख्त हिदायत दी कि अदालत को गुमराह न करें। यदि डिफाल्टर अपना ऋण जल्द चुकता नहीं करता है तो गारंटरों की संपत्तियों को भी अटैच कर दिया जाएगा।



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पहले दिन हुई 20 मामलों में सुनवाई

अदालत में पहले दिन 76 डिफाल्टरों को बुलाया गया था, जिसमें मात्र 20 ही लोग पहुंचे। इसमें एक पूर्व निदेशक का मामला भी सामने आया था जिसने 24 साल पहले 10 लाख लोन लिया था जो अब 1.80 करोड़ रुपये पहुंच गया है। साथ ही कई मामलों में गारंटरों की संपत्तियों को भी अटैच करने के आदेश जारी किए गए थे। अब वीरवार को अदालत का अंतिम दिन है। तीन दिनों में 150 डिफाल्टरों को समन जारी कर बुलाया गया था। अदालत पूरी होने के बाद अदालत में न पहुंचने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाएंगे।
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एक दर्जन मामलों पर हुई चर्चा
बुधवार को हुई अदालत में एक दर्जन के करीब लोन मामलों में चर्चा हुई। इसमें चार डिफाल्टरों की संपत्तियों को बेचने और दो की अटैच करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके अलावा गारंटरों को भी हिदायत दी गई कि जल्द डिफाल्टरों ने लोन चुकता न किया तो उनकी संपत्तियां भी अटैच होंगी। वीरवार को अदालत का अंतिम दिन है। उसके बाद अदालत में नहीं आने वाले डिफाल्टरों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

-गिरीश नड्डा, सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं, सोलन
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