चार साल से मेडिसिन विशेषज्ञ का पद खाली,स्त्री रोग और बाल रोग विशेषज्ञ के भरोसे चल रहा अस्पताल
रेडियोलॉजिस्ट, ईएनटी, स्किन और ऑर्थो विभाग भी डॉक्टर नहीं
एचआर धीमान
नालागढ़ (सोलन)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नालागढ़ इन दिनों खुद बदहाली के आंसू रो रहा है। पिछले तीन वर्षों में यहां स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। अस्पताल में विशेषज्ञों के पद रिक्त होने के कारण अब यह केवल एक रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है। अस्पताल की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां रेडियोलॉजिस्ट, मेडिसिन विशेषज्ञ, ईएनटी और स्किन रोग विशेषज्ञों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। वहीं मेडिसिन विशेषज्ञ की चार साल पहले सेवानिवृत्ति के बाद से यह पद खाली है। इसके अलावा हाल ही में हड्डी रोग विशेषज्ञ की पदोन्नति के बाद यह विभाग भी खाली हो गया है। वर्तमान में अस्पताल केवल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ और एक बाल रोग विशेषज्ञ के भरोसे चल रहा है। पूर्व विधायक लखविंद्र सिंह राणा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा शासन में इस अस्पताल को 100 बेड का दर्जा मिला था, जिसे कांग्रेस सरकार ने घटा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। बीएमओ डॉ. कविराज नेगी ने बताया कि अस्पताल में रिक्त पदों की जानकारी हर माह उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। संवाद
कम हुई ओपीडी, निजी क्लीनिकों का करना पड़ रहा रुख
नालागढ़ के वरिष्ठ नागरिक आरपी चंदेल, यादव किशोर गौतम, महेंद्र सिंह, भीम सिंह, जगतार सिंह राणा ने बताया कि अस्पताल में सुविधाओं के अभाव का सीधा असर ओपीडी पर पड़ा है। पहले जहां रोजाना 800 मरीज आते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 400 रह गई है। मजबूरन लोगों को निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उपचार और दवाइयां बेहद महंगी हैं।
कोट
जैसे ही स्वास्थ्य विभाग में नई नियुक्तियां होंगी, प्राथमिकता के आधार पर नालागढ़ अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी।
- डॉ. अजय पाठक, सीएमओ