विदेशों में अरबों के कारोबार का झांसा देकर एक फर्जी एनआरआई दंपति करोड़ों का फ्रॉड कर गायब हो गया। जरूरतमंदों को फाइनेंस करने के नाम पर आरोपी दंपत्ति ने करोड़ों का दाव खेला है। इस दौरान फाइनेंस की जाने वाली रकम के एवज में शातिरों ने पहले ही लोगों से सिक्योरिटी के रूप में चार फीसदी कैश ले लिया। यहां तक की ब्लैंक चेक भी ले लिए। बाद में मौका पाते ही रातों रात दंपति क्षेत्र से गायब हो गया। बताया जा रहा है कि विदेशों में कारोबार करने के इच्छुक कई लघु उद्यमी भी इनके जाल में फंसे हैं। यही नहीं कई सरकारी कर्मचारी भी धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं। पुलिस को इस संबंध में लोगों ने सूचित किया है। जांच के बाद मामला दर्ज होने की बात कही जा रही है।
कुछ समय पहले क्षेत्र में एक दंपति आकर रहने लगे। उनके साथ एक युवक भी था, जिसे वह अपना बेटा बताते रहे। बताया जा रहा है कि दंपति ने सबसे पहले क्षेत्र के रसूखदार लोगों में अपनी पैठ बनाई। लोगों में रौब जमाने के लिए दुकानों से सबसे महंगे सामान खरीदते थे। वह अपने आपको एनआरआई बताते हुए लोगों से कहते थे की उनका विदेशों में अरबों का कारोबार है। मानसिक शांति के लिए वह एकांत में आए हैं। इसी बीच कई जरूरतमंद लोगों को उन्होंने कैश देकर मदद भी की।
उनका नेटवर्क पूरे सोलन में फैलता चला गया। बताया जा रहा है कि सोलन से लेकर शिमला तक उनके तार जुड़ गए। बड़े-बड़े लोगों के बीच बैठने के कारण उनका परिचय भी रसूखदारों से हो गया। फिर दंपति ने उन लोगों को चुना जिनकी आर्थिक स्थिति किन्हीं कारणों से कमजोर होने लगी थी। उन्हें कम ब्याज पर फाइनेंस देने का प्रलोभन दिया गया। जब काफी जरूरतमंद लोगों का ब्योरा एकत्र हो गया तो 4 से पांच फीसदी ब्याज की दर पर ऋण उपलब्ध करवाने का झांसा दिया गया। शर्त रखी गई कि ऋण पर दी जाने वाली रकम की चार फीसदी सिक्योरिटी लगेगी, जिसे कैश इन एडवांस लिया जाएगा। जबकि ब्लैंक चेक भी लगेंगे।
डीएसपी नरवीर सिंह राठौर का कहना है कि पुलिस को सूचना मिली है। दंपति अपने आपको एनआरआई कारोबारी कहते रहे। प्रभावितों की संख्या कितनी है या नहीं यह लिखित शिकायतों के आने के बाद ही पता चल पाएगा। पुलिस उसी के आधार पर आगामी कार्रवाई करेगी। उन्होंने लोगों से इस तरह की ठगी के अलावा ऑनलाइन ठगी से बचने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए पुलिस विशेष जागरूकता अभियान छेड़े हुए है।