सोलन। शहर और आसपास लगे 26 फायर हाइड्रेंटों और दमकल वाहनों में पानी भरने के लिए कोई अलग से पाइपलाइन नहीं है। इस कारण आग की घटना होने पर अग्निशमन वाहनों में पानी भरने के लिए दमकल विभाग को नगर परिषद पर निर्भर रहना पड़ता है।
आलम यह है कि शहर में लगे हाइड्रेंटों को पेयजल मुख्य लाइन से सप्लाई दी जा रही है। दमकल वाहनों में पानी भरने के लिए शहर की पेयजल लाइन पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। इसके चलते गाड़ी भरने में अधिक समय लगता है। लोगों के घरों को पेयजल सप्लाई करने वाली मुख्यलाइन से हाइड्रेंट को जोड़ा गया है। इसे खोलने और बंद करने का जिम्मा नगर परिषद का ही है।
दमकल विभाग को पानी की दरकार पर पहले नगर परिषद को फोन पर सूचित कर पानी खुलवाना पड़ता है। नप कर्मचारी मुख्य स्टोरेज टैंक पर जाकर सप्लाई खोलता है। इसके बावजूद हाइड्रेंट में एकदम पानी नहीं पहुंचता, लोगों के निजी कनेक्शन तक पानी पहुंचने के बाद हाइड्रेंट तक पहुंचता है। इस कारण दमकल विभाग को आग की घटना के दौरान समय पर गाड़ी में पानी नहीं भरा जाता। बहरहाल, शहर में सिर्फ जल संकट का ही नहीं बल्कि प्राकृतिक आपदा का खतरा भी मंडरा रहा है। शहर में पेयजल सप्लाई नहीं होगी तो हाइड्रेंट भी किसी काम नहीं आएंगे।
फायर स्टेशन सोलन के प्रभारी राजा राम ने बताया कि दमकल विभाग के पास गाड़ियों में पानी भरने और हाइड्रेंट को पानी की सप्लाई देने के लिए अलग लाइन है। नगर परिषद मुख्य पेयजल लाइन से हाइड्रेंट को सप्लाई दे रही है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन को हाइड्रेंट के लिए अलग से पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव उनसे पहले रह चुके स्टेशन प्रभारी की ओर से भेजा था। हाइड्रेंट और वाहनों में पानी भरने के लिए अलग से लाइन बिछाने की मांग की थी।
तीन क्षेत्र से गाड़ियों में भरना पड़ता है पानी
शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में करीब 26 हाइड्रेंट लगाए गए हैं जो नगर परिषद के अधीन हैं। इसकी देखरेख का जिम्मा नप कर रहा है। सभी हाइड्रेंट्रों में से तीन हाइड्रेंट पर दमकल विभाग ने अपनी गाड़ियों में पानी भरा जाता है। इसमें चंबाघाट, सीटी चौकी सोलन और डिग्री कॉलेज के समीप लगे हाइड्रेंट शामिल हैं। यहां पर दमकल वाहन आसानी से पहुंच जाती है और उक्त क्षेत्र में जाम की समस्या भी कम है। इसमें पानी की सप्लाई 24 घंटे नहीं रहती। इसमें पानी की सप्लाई छोड़ने के लिए नगर परिषद कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता है। जब नप कर्मी उक्त हाइड्रेंट में पानी छोड़ेगा, तभी उक्त क्षेत्रों में लगे हाइड्रेंट से पानी भर सकते हैं।