छोटी-छोटी जमीन वाले किसान अब संयुक्त होकर आर्गेनिक खेती करके अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं। कृषि विभाग ने पारंपरिक जैविक खेती को जिंदा रखने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना के जरिये नई पहल की है।
यह योजना नगदी पैदावार के लिए प्रदेशभर में अव्वल सोलन समेत पूरे प्रदेश में लागू हो रही है। इसमें संबंधित क्षेत्र में छोटी-छोटी जमीन वाले किसानों के कलस्टर (ग्रुप) तैयार किए जाएंगे।
कृषि विभाग इन ग्रुपों को अपने अधीन लेगा। आर्गेनिक फार्मिंग के लिए संयुक्त रूप से ट्रेनिंग देकर घरद्वार खेती के गुर सिखाएगा। वर्तमान में आर्गेनिक पैदावार को सबसे अधिक तरजीह दी जा रही है।
हर कलस्टर में 70 से 100 तक किसान हो सकते हैं। सबसे पढ़ा लिखा कृषक इसका मुखिया बनेगा। एक कलस्टर में 50 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। प्रति ब्लॉक में दो कलस्टर बनेंगे।
वर्तमान में केंद्र सरकार से जैविक खेती के लिए विभाग को पचास लाख का बजट जारी हुआ है। यह पैसा पंजीकरण और ट्रेनिंग तथा किसानों को जैविक खेती का वातावरण तैयार करने पर खर्च किया जाएगा।
किसानों को जैविक खेती में प्रयोग लाए जाने वाले उत्पादों को 50 से 70 फीसदी तक सब्सिडी मिलेगी। इसमें खाद, बीज और अन्य सामान शामिल रहेगा।
ऑनलाइन मार्केटिंग और सलाह
इस योजना के तहत विभाग कलस्टर में सबसे पढ़े लिखे व्यक्ति को मुखिया चुनेगा। यह चुनाव उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर होगा। इसके बाद लीडर को विभाग अपनी वेबसाइट में पंजीकृत करेगा। कंप्यूटर शिक्षा में कृषि संबंधित पेचिदगियों के लिए लीडर को दक्ष बनाया जाएगा। मार्केटिंग और पैदावार के बचाव संबंधी सलाह भी ऑनलाइन ली जाएगी।
प्रमाणित जैविक खेती करेंगे किसान
इस योजना से किसानों पर कृषि विभाग की प्रमाणित जैविक खेती की मुहर लगेगी। वाणिज्यिक जैविक उत्पाद को बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य होगा। यही नहीं इससे होने वाली उपज भी कीटनाशक मुक्त होगी। इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। इस योजना के द्वारा किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विवि के पीआरओ डा. अनिल सूद ने बताया कि जैविक पैदावार से तैयार सब्जियां सामान्य से महंगी होती हैं। कई बार तो बाजार में मिलने वाली सब्जियों से जैविक पैदावार से तैयार सब्जियों के दाम दो से तीन गुणा महंगे होते हैं।
किसान ऐसे उठा सकते हैं लाभ
इस योजना का लाभ वही किसान उठा पाएंगे जिन के पास एक या दो बीघा खेती के लिए जमीन हो। योजना के तहत किसानों का रजिस्ट्रेशन कृषि विभाग द्वारा किया जाएगा। विभाग द्वारा नियुक्त किए सब्जेक्ट मेटर स्पेशलिस्ट (एसएमएस) के पास इच्छुक किसान आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण होगा। इससे किसानों को यह फायदा होगा कि व्यापारी उन तक सीधे संपर्क कर पाएंगे। इससे किसानों को उनके द्वारा उगाई फसलों और सब्जियों पर मिलने वाला मुनाफा भी अधिक होगा।
आर्थिक स्थिति होगी मजबूत : डा. वाईपी शर्मा
कृषि विभाग से सेवानिवृत्त उपनिदेशक डा. वाईपी शर्मा ने बताया कि इस योजना के लागू होने के बाद प्रदेश के किसानों को मिडिल एजेंटों से होने वाला आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद व्यापारी उन तक सीधे संपर्क कर पाएंगे।