संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ (फेडरेशन) के चुनाव में मंगलवार को हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच चुनाव स्थगित करना पड़ा। सुबह 11 बजे मतदान का समय तय किया गया था। चुनाव पर्यवेक्षक और सभी निदेशक समय पर पहुंच गए, लेकिन हाथ खड़े करके मतदान और गुप्त मतदान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। चुनाव के दौरान कांग्रेस के निदेशक हाथ खड़े करके चुनाव का फैसला करने के बजाय गुप्त मतदान पर अड़े रहे। वहीं कुछ अन्य निदेशकों ने हाथ खड़े कर वोटिंग करने को कहा। इसके चलते सभागार में बहस चलती रही और अंत में सभी निदेशकों ने चुनाव अगली तिथि तक स्थगित करने का निर्णय लिया। चुनाव अधिकारी राकेश ठाकुर ने सभी निदेशकों की राय स्वीकार करते हुए कहा कि अगली तिथि के लिए सरकार को पत्र भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि कानून में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव में हाथ खड़े कर या मतदान से फैसला लेने का प्रावधान है, लेकिन जब निदेशकों ने गुप्त मतदान की मांग की, तो चुनाव स्थगित करना पड़ा।
कांग्रेस को क्राॅस वोटिंग का डर
बहुमत के लिए कांग्रेस के पास आंकड़ा पूरा था। कांग्रेस के पास दो निर्वाचित और 6 मनोनीत निदेशक हैं, जबकि भाजपा के पास 7 निर्वाचित निदेशक हैं। कुल 15 सदस्यीय बोर्ड में बहुमत के लिए 8 निदेशकों चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के हक में होना अनिवार्य है। अब सवाल उठ रहा है कि कांग्रेस बहुमत के बावजूद चेयरमैन व वाइस चेयरमैन का पद हासिल क्यों नहीं कर पाई। कांग्रेस बैकफुट पर जाने के लिए मजबूर शायद इसलिए हुई कि उसे क्राॅस वोटिंग का डर सता रहा था।
भाजपा ने बदल दिया उम्मीदवार
भाजपा ने अपनी रणनीति से सबको चौंका दिया। पहले सुंदरम ठाकुर और विजय सिंह ठाकुर के नाम चर्चा में थे, लेकिन नालागढ़ से रणजीत सिंह ठाकुर को चेयरमैन पद का उम्मीदवार उतारकर भाजपा ने नया कार्ड खेल दिया। रणजीत सिंह ने दावा किया है कि उनके पास 9 निदेशकों का समर्थन है और जीत उनकी ही होगी।
चार माह से रिक्त हैं चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के पद
फेडरेशन के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के पद चार माह से रिक्त पड़े हैं। फेडरेशन के निदेशक मंडल के चुनाव 25 नवंबर को हो गए थे। इसमें भाजपा ने 7 और कांग्रेस ने 2 सीटें जीते थीं। इसके बाद कांग्रेस ने अब चुनाव जीतने के लिए 6 निदेशकों को मनोनित कर दिया। हालांकि कांग्रेस ने पहले तीन निदेशक मनोनित किए तो उनकी संख्या पांच हो गई थी और 16 फरवरी को चुनाव की तिथि निर्धारित की गई। मगर बाद में वह रद्द कर दी गई। वहीं सोमवार को तीन नए निदेशक फिर से मनोनित कर कांग्रेस ने अपना पलड़ा भारी कर लिया है।